ज़बूर 54:1-7 DGV - Bible AI

ख़तरे में फंसे हुए शख़्स की इल्तिजा

1दाऊद का ज़बूर। हिक्मत का यह गीत तारदार साज़ों के साथ गाना है। यह उस वक़्त से मुताल्लिक़ है जब ज़ीफ़ के बाशिन्दों ने साऊल के पास जा कर कहा, “दाऊद हमारे पास छुपा हुआ है।” ऐ अल्लाह, अपने नाम के ज़रीए से मुझे छुटकारा दे! अपनी क़ुदरत के ज़रीए से मेरा इन्साफ़ कर!

2ऐ अल्लाह, मेरी इल्तिजा सुन, मेरे मुँह के अल्फ़ाज़ पर ध्यान दे।

3क्यूँकि परदेसी मेरे ख़िलाफ़ उठ खड़े हुए हैं, ज़ालिम जो अल्लाह का लिहाज़ नहीं करते मेरी जान लेने के दरपै हैं। (सिलाह)

4लेकिन अल्लाह मेरा सहारा है, रब मेरी ज़िन्दगी क़ाइम रखता है।

5वह मेरे दुश्मनों की शरारत उन पर वापस लाएगा। चुनाँचे अपनी वफ़ादारी दिखा कर उन्हें तबाह कर दे!

6मैं तुझे रज़ाकाराना क़ुर्बानी पेश करूँगा। ऐ रब, मैं तेरे नाम की सताइश करूँगा, क्यूँकि वह भला है।

7क्यूँकि उस ने मुझे सारी मुसीबत से रिहाई दी, और अब मैं अपने दुश्मनों की शिकस्त देख कर ख़ुश हूँगा।

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