1मादी बादशाह दारा की हुकूमत के पहले साल से ही मैं मीकाएल के साथ खड़ा रहा हूँ ताकि उस को सहारा दूँ और उस की हिफ़ाज़त करूँ।)
शिमाली और जुनूबी सल्तनतों की जंगें
2अब मैं तुझे वह कुछ बताता हूँ जो यक़ीनन पेश आएगा। फ़ारस में मज़ीद तीन बादशाह तख़्त पर बैठेंगे। इस के बाद एक चौथा आदमी बादशाह बनेगा जो तमाम दूसरों से कहीं ज़्यादा दौलतमन्द होगा। जब वह दौलत के बाइस ताक़तवर हो जाएगा तो वह यूनानी मम्लकत से लड़ने के लिए सब कुछ जमा करेगा।
3फिर एक ज़ोर-आवर बादशाह बरपा हो जाएगा जो बड़ी क़ुव्वत से हुकूमत करेगा और जो जी चाहे करेगा।
4लेकिन जूँ ही वह बरपा हो जाए उस की सल्तनत टुकड़े टुकड़े हो कर एक शिमाली, एक जुनूबी, एक मग़रिबी और एक मशरिक़ी हिस्से में तक़्सीम हो जाएगी। न यह चार हिस्से पहली सल्तनत जितने ताक़तवर होंगे, न बादशाह की औलाद तख़्त पर बैठेगी, क्यूँकि उस की सल्तनत जड़ से उखाड़ कर दूसरों को दी जाएगी।
5जुनूबी मुल्क का बादशाह तक़वियत पाएगा, लेकिन उस का एक अफ़्सर कहीं ज़्यादा ताक़तवर हो जाएगा, उस की हुकूमत कहीं ज़्यादा मज़बूत होगी।
6चन्द साल के बाद दोनों सल्तनतें मुत्तहिद हो जाएँगी। अह्द को मज़बूत करने के लिए जुनूबी बादशाह की बेटी की शादी शिमाली बादशाह से कराई जाएगी। लेकिन न बेटी कामयाब होगी, न उस का शौहर और न उस की ताक़त क़ाइम रहेगी। उन दिनों में उसे उस के साथियों, बाप और शौहर समेत दुश्मन के हवाले किया जाएगा।
7बेटी की जगह उस का एक रिश्तेदार खड़ा हो जाएगा जो शिमाली बादशाह की फ़ौज पर हम्ला करके उस के क़िले में घुस आएगा। वह उन से निपट कर फ़त्ह पाएगा
8और उन के ढाले हुए बुतों को सोने-चाँदी की क़ीमती चीज़ों समेत छीन कर मिस्र ले जाएगा। वह कुछ साल तक शिमाली बादशाह को नहीं छेड़ेगा।
9फिर शिमाली बादशाह जुनूबी बादशाह के मुल्क में घुस आएगा, लेकिन उसे अपने मुल्क में वापस जाना पड़ेगा।
10इस के बाद उस के बेटे जंग की तय्यारियाँ करके बड़ी बड़ी फ़ौजें जमा करेंगे। उन में से एक जुनूबी बादशाह की तरफ़ बढ़ कर सैलाब की तरह जुनूबी मुल्क पर आएगी और लड़ते लड़ते उस के क़िले तक पहुँचेगी।
11फिर जुनूबी बादशाह तैश में आ कर शिमाली बादशाह से लड़ने के लिए निकलेगा। शिमाली बादशाह जवाब में बड़ी फ़ौज खड़ी करेगा, लेकिन वह शिकस्त खा कर
12तबाह हो जाएगी। तब जुनूबी बादशाह का दिल ग़ुरूर से भर जाएगा, और वह बेशुमार अफ़राद को मौत के घाट उतारेगा। तो भी वह ताक़तवर नहीं रहेगा।
13क्यूँकि शिमाली बादशाह एक और फ़ौज जमा करेगा जो पहली की निस्बत कहीं ज़्यादा बड़ी होगी। चन्द साल के बाद वह इस बड़ी और हथियारों से लेस फ़ौज के साथ जुनूबी बादशाह से लड़ने आएगा।
14उस वक़्त बहुत से लोग जुनूबी बादशाह के ख़िलाफ़ उठ खड़े होंगे। तेरी क़ौम के बेदीन लोग भी उस के ख़िलाफ़ खड़े हो जाएंगे और यूँ रोया को पूरा करेंगे। लेकिन वह ठोकर खा कर गिर जाएंगे।
15फिर शिमाली बादशाह आ कर एक क़िलाबन्द शहर का मुहासरा करेगा। वह पुश्ता बना कर शहर पर क़ब्ज़ा कर लेगा। जुनूब की फ़ौजें उसे रोक नहीं सकेंगी, उन के बेहतरीन दस्ते भी बेबस हो कर उस का सामना नहीं कर सकेंगे।
16हम्लाआवर बादशाह जो जी चाहे करेगा, और कोई उस का सामना नहीं कर सकेगा।
17तब वह अपनी पूरी सल्तनत पर क़ाबू पाने का मन्सूबा बांधेगा। इस ज़िम्न में वह जुनूबी बादशाह के साथ अह्द बांध कर उस से अपनी बेटी की शादी कराएगा ताकि जुनूबी मुल्क को तबाह करे, लेकिन बेफ़ाइदा। मन्सूबा नाकाम हो जाएगा।
18इस के बाद वह साहिली इलाक़ों की तरफ़ रुख़ करेगा। उन में से वह बहुतों पर क़ब्ज़ा भी करेगा, लेकिन आख़िरकार एक हुक्मरान उस के गुस्ताखाना रवय्ये का ख़ातमा करेगा, और उसे शर्मिन्दा हो कर पीछे हटना पड़ेगा।
19फिर शिमाली बादशाह अपने मुल्क के क़िलों के पास वापस आएगा, लेकिन इतने में ठोकर खा कर गिर जाएगा। तब उस का नाम-ओ-निशान तक नहीं रहेगा।
20उस की जगह एक बादशाह बरपा हो जाएगा जो अपने अफ़्सर को शानदार मुल्क इस्राईल में भेजेगा ताकि वहाँ से गुज़र कर लोगों से टैक्स ले। लेकिन थोड़े दिनों के बाद वह तबाह हो जाएगा। न वह किसी झगड़े के सबब से हलाक होगा, न किसी जंग में।
इस्राईली क़ौम का बड़ा दुश्मन
21उस की जगह एक क़ाबिल-ए-मज़म्मत आदमी खड़ा हो जाएगा। वह तख़्त के लिए मुक़र्रर नहीं हुआ होगा बल्कि ग़ैरमुतवक़्क़े तौर पर आ कर साज़िशों के वसीले से बादशाह बनेगा।
22मुख़ालिफ़ फ़ौजें उस पर टूट पड़ेंगी, लेकिन वह सैलाब की तरह उन पर आ कर उन्हें बहा ले जाएगा। वह और अह्द का एक रईस तबाह हो जाएंगे।
23क्यूँकि उस के साथ अह्द बांधने के बाद वह उसे फ़रेब देगा और सिर्फ़ थोड़े ही अफ़राद के ज़रीए इक़तिदार हासिल कर लेगा।
24वह ग़ैरमुतवक़्क़े तौर पर दौलतमन्द सूबों में घुस कर वह कुछ करेगा जो न उस के बाप और न उस के बापदादा से कभी सरज़द हुआ होगा। लूटा हुआ माल और मिलकियत वह अपने लोगों में तक़्सीम करेगा। वह क़िलाबन्द शहरों पर क़ब्ज़ा करने के मन्सूबे भी बांधेगा, लेकिन सिर्फ़ मह्दूद अर्से के लिए।
25फिर वह हिम्मत बांध कर और पूरा ज़ोर लगा कर बड़ी फ़ौज के साथ जुनूबी बादशाह से लड़ने जाएगा। जवाब में जुनूबी बादशाह एक बड़ी और निहायत ही ताक़तवर फ़ौज को लड़ने के लिए तय्यार करेगा। तो भी वह शिमाली बादशाह का सामना नहीं कर पाएगा, इस लिए कि उस के ख़िलाफ़ साज़िशें कामयाब हो जाएँगी।
26उस की रोटी खाने वाले ही उसे तबाह करेंगे। तब उस की फ़ौज मुन्तशिर हो जाएगी, और बहुत से अफ़राद मैदान-ए-जंग में खेत आएँगे।
27दोनों बादशाह मुज़ाकरात के लिए एक ही मेज़ पर बैठ जाएंगे। वहाँ दोनों झूट बोलते हुए एक दूसरे को नुक़्सान पहुँचाने के लिए कोशाँ रहेंगे। लेकिन किसी को कामयाबी हासिल नहीं होगी, क्यूँकि मुक़र्ररा आख़िरी वक़्त अभी नहीं आना है।
28शिमाली बादशाह बड़ी दौलत के साथ अपने मुल्क में वापस चला जाएगा। रास्ते में वह मुक़द्दस अह्द की क़ौम इस्राईल पर ध्यान दे कर उसे नुक़्सान पहुँचाएगा, फिर अपने वतन वापस जाएगा।
29मुक़र्ररा वक़्त पर वह दुबारा जुनूबी मुल्क में घुस आएगा, लेकिन पहले की निस्बत इस बार नतीजा फ़र्क़ होगा।
30क्यूँकि कित्तीम के बहरी जहाज़ उस की मुख़ालफ़त करेंगे, और वह हौसला हारेगा।
31उस के फ़ौजी आ कर क़िलाबन्द मक़्दिस की बेहुरमती करेंगे। वह रोज़ाना की क़ुर्बानियों का इन्तिज़ाम बन्द करके तबाही का मकरूह बुत खड़ा करेंगे।
32जो यहूदी पहले से अह्द की ख़िलाफ़वरज़ी कर रहे होंगे उन्हें वह चिकनी-चुपड़ी बातों से मुर्तद हो जाने पर आमादा करेगा। लेकिन जो लोग अपने ख़ुदा को जानते हैं वह मज़बूत रह कर उस की मुख़ालफ़त करेंगे।
33क़ौम के समझदार बहुतों को सहीह राह की तालीम देंगे। लेकिन कुछ अर्से के लिए वह तलवार, आग, क़ैद और लूट-मार के बाइस डाँवाँडोल रहेंगे।
34उस वक़्त उन्हें थोड़ी बहुत मदद हासिल तो होगी, लेकिन बहुत से ऐसे लोग उन के साथ मिल जाएंगे जो मुख़लिस नहीं होंगे।
35समझदारों में से कुछ डाँवाँडोल हो जाएंगे ताकि लोगों को आज़मा कर आख़िरी वक़्त तक ख़ालिस और पाक-साफ़ किया जाए। क्यूँकि मुक़र्ररा वक़्त कुछ देर के बाद आएगा।
36बादशाह जो जी चाहे करेगा। वह सरफ़राज़ हो कर अपने आप को तमाम माबूदों से अज़ीम क़रार देगा। ख़ुदाओं के ख़ुदा के ख़िलाफ़ वह नाक़ाबिल-ए-बयान कुफ़्र बकेगा। उसे कामयाबी भी हासिल होगी, लेकिन सिर्फ़ उस वक़्त तक जब तक इलाही ग़ज़ब ठंडा न हो जाए। क्यूँकि जो कुछ मुक़र्रर हुआ है उसे पूरा होना है।
37बादशाह न अपने बापदादा के देवताओं की परवा करेगा, न औरतों के अज़ीज़ देवता की, न किसी और की। क्यूँकि वह अपने आप को सब पर सरफ़राज़ करेगा।
38इन देवताओं के बजाए वह क़िलों के देवता की पूजा करेगा जिस से उस के बापदादा वाक़िफ़ ही नहीं थे। वह सोने-चाँदी, जवाहिरात और क़ीमती तोह्फ़ों से देवता का एहतिराम करेगा।
39चुनाँचे वह अजनबी माबूद की मदद से मज़बूत क़िलों पर हम्ला करेगा। जो उस की हुकूमत मानें उन की वह बड़ी इज़्ज़त करेगा, इन्हें बहुतों पर मुक़र्रर करेगा और उन में अज्र के तौर पर ज़मीन तक़्सीम करेगा।
40लेकिन फिर आख़िरी वक़्त आएगा। जुनूबी बादशाह जंग में उस से टकराएगा, तो जवाब में शिमाली बादशाह रथ, घुड़सवार और मुतअद्दिद बहरी जहाज़ ले कर उस पर टूट पड़ेगा। तब वह बहुत से मुल्कों में घुस आएगा और सैलाब की तरह सब कुछ ग़र्क़ करके आगे बढ़ेगा।
41इस दौरान वह ख़ूबसूरत मुल्क इस्राईल में भी घुस आएगा। बहुत से ममालिक शिकस्त खाएँगे, लेकिन अदोम और मोआब अम्मोन के मर्कज़ी हिस्से समेत बच जाएंगे।
42उस वक़्त उस का इक़तिदार बहुत से ममालिक पर छा जाएगा, मिस्र भी नहीं बचेगा।
43शिमाली बादशाह मिस्र की सोने-चाँदी और बाक़ी दौलत पर क़ब्ज़ा करेगा, और लिबिया और एथोपिया भी उस के नक़्श-ए-क़दम पर चलेंगे।
44लेकिन फिर मशरिक़ और शिमाल की तरफ़ से अफ़्वाहें उसे सदमा पहुँचाएँगी, और वह बड़े तैश में आ कर बहुतों को तबाह और हलाक करने के लिए निकलेगा।
45रास्ते में वह समुन्दर और ख़ूबसूरत मुक़द्दस पहाड़ के दरमियान अपने शाही ख़ैमे लगा लेगा। लेकिन फिर उस का अन्जाम आएगा, और कोई उस की मदद नहीं करेगा।