बाबल शहर की शिकस्त
1इस के बाद मैं ने एक और फ़रिश्ता देखा जो आसमान पर से उतर रहा था। उसे बहुत इख़तियार हासिल था और ज़मीन उस के जलाल से रौशन हो गई।
2उस ने ऊँची आवाज़ से पुकार कर कहा, “वह गिर गई है! हाँ, अज़ीम कस्बी बाबल गिर गई है! अब वह शयातीन का घर और हर बदरूह का बसेरा बन गई है, हर नापाक और घिनौने परिन्दे का बसेरा।
3क्यूँकि तमाम क़ौमों ने उस की हरामकारी और मस्ती की मै पी ली है। ज़मीन के बादशाहों ने उस के साथ ज़िना किया और ज़मीन के सौदागर उस की बेलगाम अय्याशी से अमीर हो गए हैं।”
4फिर मैं ने एक और आवाज़ सुनी। उस ने आसमान की तरफ़ से कहा,
5क्यूँकि उस के गुनाह आसमान तक पहुँच गए हैं,
6उस के साथ वही सुलूक करो
7उसे उतनी ही अज़ियत और ग़म पहुँचा दो
8इस वजह से एक दिन यह बलाएँ
9और ज़मीन के जिन बादशाहों ने उस के साथ ज़िना और अय्याशी की वह उस के जलने का धुआँ देख कर रो पड़ेंगे और आह-ओ-ज़ारी करेंगे।
10वह उस की अज़ियत को देख कर ख़ौफ़ खाएँगे और दूर दूर खड़े हो कर कहेंगे, “अफ़्सोस! तुझ पर अफ़्सोस, ऐ अज़ीम और ताक़तवर शहर बाबल! एक ही घंटे के अन्दर अन्दर अल्लाह की अदालत तुझ पर आ गई है।”
11ज़मीन के सौदागर भी उसे देख कर रो पड़ेंगे और आह-ओ-ज़ारी करेंगे, क्यूँकि कोई नहीं रहा होगा जो उन का माल ख़रीदे :
12उन का सोना, चाँदी, बेशक़ीमत जवाहिर, मोती, बारीक कतान, अर्ग़वानी और क़िर्मिज़ी रंग का कपड़ा, रेशम, हर क़िस्म की ख़ुश्बूदार लकड़ी, हाथीदाँत की हर चीज़ और क़ीमती लकड़ी, पीतल, लोहे और संग-ए-मरमर की हर चीज़,
13दारचीनी, मसाला, अगरबत्ती, मुर, बख़ूर, मै, ज़ैतून का तेल, बेहतरीन मैदा, गन्दुम, गाय-बैल, भेड़ें, घोड़े, रथ और ग़ुलाम यानी इन्सान।
14सौदागर उस से कहेंगे, “जो फल तू चाहती थी वह तुझ से दूर हो गया है। तेरी तमाम दौलत और शान-ओ-शौकत ग़ाइब हो गई है और आइन्दा कभी भी तेरे पास पाई नहीं जाएगी।”
15जो सौदागर उसे यह चीज़ें फ़रोख़्त करने से दौलतमन्द हुए वह उस की अज़ियत देख कर ख़ौफ़ के मारे दूर दूर खड़े हो जाएंगे। वह रो रो कर मातम करेंगे
16और कहेंगे, “हाय! तुझ पर अफ़्सोस, ऐ अज़ीम शहर, ऐ ख़ातून जो पहले बारीक कतान, अर्ग़वानी और क़िर्मिज़ी रंग के कपड़े पहने फिरती थी और जो सोने, क़ीमती जवाहिर और मोतियों से सजी हुई थी।
17एक ही घंटे के अन्दर अन्दर सारी दौलत तबाह हो गई है!”
18उस के जलने का धुआँ देख कर वह कहेंगे, “क्या कभी कोई इतना अज़ीम शहर था?”
19वह अपने सरों पर ख़ाक डाल लेंगे और चिल्ला चिल्ला कर रोएँगे और आह-ओ-ज़ारी करेंगे। वह कहेंगे, “हाय! तुझ पर अफ़्सोस, ऐ अज़ीम शहर, जिस की दौलत से तमाम बहरी जहाज़ों के मालिक अमीर हुए। एक ही घंटे के अन्दर अन्दर वह वीरान हो गया है।”
20ऐ आसमान, उसे देख कर ख़ुशी मना!
21फिर एक ताक़तवर फ़रिश्ते ने बड़ी चक्की के पाट की मानिन्द एक बड़े पत्थर को उठा कर समुन्दर में फैंक दिया। उस ने कहा, “अज़ीम शहर बाबल को इतनी ही ज़बरदस्ती से पटक दिया जाएगा। बाद में उसे कहीं नहीं पाया जाएगा।
22अब से न मौसीक़ारों की आवाज़ें तुझ में कभी सुनाई देंगी, न सरोद, बाँसरी या तुरम बजाने वालों की। अब से किसी भी काम का कारीगर तुझ में पाया नहीं जाएगा। हाँ, चक्की की आवाज़ हमेशा के लिए बन्द हो जाएगी।
23अब से चराग़ तुझे रौशन नहीं करेगा, दुल्हन-दूल्हे की आवाज़ तुझ में सुनाई नहीं देगी। हाय, तेरे सौदागर दुनिया के बड़े बड़े अफ़्सर थे, और तेरी जादूगरी से तमाम क़ौमों को बहकाया गया।”
24हाँ, बाबल में नबियों, मुक़द्दसीन और उन तमाम लोगों का ख़ून पाया गया है जो ज़मीन पर शहीद हो गए हैं।