हननियाह नबी की मुख़ालफ़त
1उसी साल के पाँचवें महीने
2“रब्ब-उल-अफ़्वाज जो इस्राईल का ख़ुदा है फ़रमाता है कि मैं शाह-ए-बाबल का जूआ तोड़ डालूँगा।
3दो साल के अन्दर अन्दर मैं रब के घर का वह सारा सामान इस जगह वापस पहुँचाऊँगा जो शाह-ए-बाबल नबूकदनज़्ज़र यहाँ से निकाल कर बाबल ले गया था।
4उस वक़्त मैं यहूदाह के बादशाह यहूयाकीन
5यह सुन कर यरमियाह ने इमामों और रब के घर में खड़े बाक़ी परस्तारों की मौजूदगी में हननियाह नबी से कहा,
6“आमीन! रब ऐसा ही करे, वह तेरी पेशगोई पूरी करके रब के घर का सामान और तमाम जिलावतनों को बाबल से इस जगह वापस लाए।
7लेकिन उस पर तवज्जुह दे जो मैं तेरी और पूरी क़ौम की मौजूदगी में बयान करता हूँ!
8क़दीम ज़माने से ले कर आज तक जितने नबी मुझ से और तुझ से पहले ख़िदमत करते आए हैं उन्हों ने मुतअद्दिद मुल्कों और बड़ी बड़ी सल्तनतों के बारे में नबुव्वत की थी कि उन पर जंग, आफ़त और मोहलक बीमारियाँ नाज़िल होंगी।
9चुनाँचे ख़बरदार! जो नबी सलामती की पेशगोई करे उस की तस्दीक़ उस वक़्त होगी जब उस की पेशगोई पूरी हो जाएगी। उसी वक़्त लोग जान लेंगे कि उसे वाक़ई रब की तरफ़ से भेजा गया है।”
10तब हननियाह ने लकड़ी के जूए को यरमियाह की गर्दन पर से उतार कर उसे तोड़ दिया।
11तमाम लोगों के सामने उस ने कहा, “रब फ़रमाता है कि दो साल के अन्दर अन्दर मैं इसी तरह शाह-ए-बाबल नबूकदनज़्ज़र का जूआ तमाम क़ौमों की गर्दन पर से उतार कर तोड़ डालूँगा।” तब यरमियाह वहाँ से चला गया।
12इस वाकिए के थोड़ी देर बाद रब यरमियाह से हमकलाम हुआ,
13“जा, हननियाह को बता, ‘रब फ़रमाता है कि तू ने लकड़ी का जूआ तो तोड़ दिया है, लेकिन उस की जगह तू ने अपनी गर्दन पर लोहे का जूआ रख लिया है।’
14क्यूँकि रब्ब-उल-अफ़्वाज जो इस्राईल का ख़ुदा है फ़रमाता है कि मैं ने लोहे का जूआ इन तमाम क़ौमों पर रख दिया है ताकि वह नबूकदनज़्ज़र की ख़िदमत करें। और न सिर्फ़ यह उस की ख़िदमत करेंगे बल्कि मैं जंगली जानवरों को भी उस के हाथ में कर दूँगा।”
15फिर यरमियाह ने हननियाह से कहा, “ऐ हननियाह, सुन! गो रब ने तुझे नहीं भेजा तो भी तू ने इस क़ौम को झूट पर भरोसा रखने पर आमादा किया है।
16इस लिए रब फ़रमाता है, ‘मैं तुझे रू-ए-ज़मीन पर से मिटाने को हूँ। इसी साल तू मर जाएगा, इस लिए कि तू ने रब से सरकश होने का मश्वरा दिया है’।”
17और ऐसा ही हुआ। उसी साल के सातवें महीने