यरमियाह 37:1-21 DGV - Bible AI

मिस्र सिदक़ियाह की मदद नहीं कर सकता

1यहूदाह के बादशाह यहूयाकीन[२२] बिन यहूयक़ीम को तख़्त से उतारने के बाद शाह-ए-बाबल नबूकदनज़्ज़र ने सिदक़ियाह बिन यूसियाह को तख़्त पर बिठा दिया।

2लेकिन न सिदक़ियाह, न उस के अफ़्सरों या अवाम ने उन पैग़ामात पर ध्यान दिया जो रब ने यरमियाह नबी की मारिफ़त फ़रमाए थे।

3एक दिन सिदक़ियाह बादशाह ने यहूकल बिन सलमियाह और इमाम सफ़नियाह बिन मासियाह को यरमियाह के पास भेजा ताकि वह गुज़ारिश करें, “मेहरबानी करके रब हमारे ख़ुदा से हमारी शफ़ाअत करें।”

4यरमियाह को अब तक क़ैद में डाला नहीं गया था, इस लिए वह आज़ादी से लोगों में चल फिर सकता था।

5उस वक़्त फ़िरऔन की फ़ौज मिस्र से निकल कर इस्राईल की तरफ़ बढ़ रही थी। जब यरूशलम का मुहासरा करने वाली बाबल की फ़ौज को यह ख़बर मिली तो वह वहाँ से पीछे हट गई।

6तब रब यरमियाह नबी से हमकलाम हुआ,

7“रब इस्राईल का ख़ुदा फ़रमाता है कि शाह-ए-यहूदाह ने तुम्हें मेरी मर्ज़ी दरयाफ़्त करने भेजा है। उसे जवाब दो कि फ़िरऔन की जो फ़ौज तुम्हारी मदद करने के लिए निकल आई है वह अपने मुल्क वापस लौटने को है।

8फिर बाबल के फ़ौजी वापस आ कर यरूशलम पर हम्ला करेंगे। वह इसे अपने क़ब्ज़े में ले कर नज़र-ए-आतिश कर देंगे।

9क्यूँकि रब फ़रमाता है कि यह सोच कर धोका मत खाओ कि बाबल की फ़ौज ज़रूर हमें छोड़ कर चली जाएगी। ऐसा कभी नहीं होगा!

10ख़्वाह तुम हम्लाआवर पूरी बाबली फ़ौज को शिकस्त क्यूँ न देते और सिर्फ़ ज़ख़्मी आदमी बचे रहते तो भी तुम नाकाम रहते, तो भी यह बाज़ एक आदमी अपने ख़ैमों में से निकल कर यरूशलम को नज़र-ए-आतिश करते।”

यरमियाह को क़ैद में डाला जाता है

11जब फ़िरऔन की फ़ौज इस्राईल की तरफ़ बढ़ने लगी तो बाबल के फ़ौजी यरूशलम को छोड़ कर पीछे हट गए।

12उन दिनों में यरमियाह बिनयमीन के क़बाइली इलाक़े के लिए रवाना हुआ, क्यूँकि वह अपने रिश्तेदारों के साथ कोई मौरूसी मिलकियत तक़्सीम करना चाहता था। लेकिन जब वह शहर से निकलते हुए

13बिनयमीन के दरवाज़े तक पहुँच गया तो पहरेदारों का एक अफ़्सर उसे पकड़ कर कहने लगा, “तुम भगोड़े हो! तुम बाबल की फ़ौज के पास जाना चाहते हो!” अफ़्सर का नाम इरियाह बिन सलमियाह बिन हननियाह था।

14यरमियाह ने एतिराज़ किया, “यह झूट है, मैं भगोड़ा नहीं हूँ! मैं बाबल की फ़ौज के पास नहीं जा रहा।” लेकिन इरियाह न माना बल्कि उसे गिरिफ़्तार करके सरकारी अफ़्सरों के पास ले गया।

15उसे देख कर उन्हें यरमियाह पर ग़ुस्सा आया, और वह उस की पिटाई करा कर उसे शाही मुहर्रिर यूनतन के घर में लाए जिसे उन्हों ने क़ैदख़ाना बनाया था।

16वहाँ उसे एक ज़मीनदोज़ कमरे में डाल दिया गया जो पहले हौज़ था और जिस की छत मेहराबदार थी। वह मुतअद्दिद दिन उस में बन्द रहा।

17एक दिन सिदक़ियाह ने उसे महल में बुलाया। वहाँ अलाहिदगी में उस से पूछा, “क्या रब की तरफ़ से मेरे लिए कोई पैग़ाम है?” यरमियाह ने जवाब दिया, “जी हाँ। आप को शाह-ए-बाबल के हवाले किया जाएगा।”

18तब यरमियाह ने सिदक़ियाह बादशाह से अपनी बात जारी रख कर कहा, “मुझ से क्या जुर्म हुआ है? मैं ने आप के अफ़्सरों और अवाम का क्या क़ुसूर किया है कि मुझे जेल में डलवा दिया?

19आप के वह नबी कहाँ हैं जिन्हों ने आप को पेशगोई सुनाई कि शाह-ए-बाबल न आप पर, न इस मुल्क पर हम्ला करेगा?

20ऐ मेरे मालिक और बादशाह, मेहरबानी करके मेरी बात सुनें, मेरी गुज़ारिश पूरी करें! मुझे यूनतन मुहर्रिर के घर में वापस न भेजें, वर्ना मैं मर जाऊँगा।”

21तब सिदक़ियाह बादशाह ने हुक्म दिया कि यरमियाह को शाही मुहाफ़िज़ों के सहन में रखा जाए। उस ने यह हिदायत भी दी कि जब तक शहर में रोटी दस्तयाब हो यरमियाह को नानबाई-गली से हर रोज़ एक रोटी मिलती रहे। चुनाँचे यरमियाह मुहाफ़िज़ों के सहन में रहने लगा।