यशूअ 13:1-33 DGV - Bible AI

कनआन के बाक़ी इलाक़ों पर क़ब्ज़ा करने का हुक्म

1जब यशूअ बूढ़ा था तो रब ने उस से कहा, “तू बहुत बूढ़ा हो चुका है, लेकिन अभी काफ़ी कुछ बाक़ी रह गया है जिस पर क़ब्ज़ा करने की ज़रूरत है।

2इस में फ़िलिस्तियों के तमाम इलाक़े उन के शाही शहरों ग़ज़्ज़ा, अश्दूद, अस्क़लून, जात और अक़्रून समेत शामिल हैं और इसी तरह जसूर का इलाक़ा जिस की जुनूबी सरहद वादी-ए-सैहूर है जो मिस्र के मशरिक़ में है और जिस की शिमाली सरहद अक़्रून है। उसे भी मुल्क-ए-कनआन का हिस्सा क़रार दिया जाता है। अव्वियों का इलाक़ा भी

4जो जुनूब में है अब तक इस्राईल के क़ब्ज़े में नहीं आया। यही बात शिमाल पर भी सादिक़ आती है। सैदानियों के शहर मआरा से ले कर अफ़ीक़ शहर और अमोरियों की सरहद तक सब कुछ अब तक इस्राईल की हुकूमत से बाहर है।

5इस के इलावा जबलियों का मुल्क और मशरिक़ में पूरा लुबनान हर्मून पहाड़ के दामन में बाल-जद से ले कर लबो-हमात तक बाक़ी रह गया है।

6इस में उन सैदानियों का तमाम इलाक़ा भी शामिल है जो लुबनान के पहाड़ों और मिस्रफ़ात-माइम के दरमियान के पहाड़ी इलाक़े में आबाद हैं। इस्राईलियों के बढ़ते बढ़ते मैं ख़ुद ही इन लोगों को उन के सामने से निकाल दूँगा। लेकिन लाज़िम है कि तू क़ुरआ डाल कर यह पूरा मुल्क मेरे हुक्म के मुताबिक़ इस्राईलियों में तक़्सीम करे।

7उसे नौ बाक़ी क़बीलों और मनस्सी के आधे क़बीले को विरासत में दे दे।”

यर्दन के मशरिक़ में मुल्क की तक़्सीम

8रब का ख़ादिम मूसा रूबिन, जद और मनस्सी के बाक़ी आधे क़बीले को दरया-ए-यर्दन का मशरिक़ी इलाक़ा दे चुका था।

9यूँ हस्बोन के अमोरी बादशाह सीहोन के तमाम शहर उन के क़ब्ज़े में आ गए थे यानी जुनूबी वादी-ए-अर्नोन के किनारे पर शहर अरोईर और उसी वादी के बीच के शहर से ले कर शिमाल में अम्मोनियों की सरहद तक। दीबोन और मीदबा के दरमियान का मैदान-ए-मुर्तफ़ा भी इस में शामिल था

11और इसी तरह जिलिआद, जसूरियों और माकातियों का इलाक़ा, हर्मून का पहाड़ी इलाक़ा और सल्का शहर तक बसन का सारा इलाक़ा भी।

12पहले यह सारा इलाक़ा बसन के बादशाह ओज के क़ब्ज़े में था जिस की हुकूमत के मर्कज़ अस्तारात और इद्रई थे। रफ़ाइयों के देओक़ामत क़बीले से सिर्फ़ ओज बाक़ी रह गया था। मूसा की राहनुमाई के तहत इस्राईलियों ने उस इलाक़े पर फ़त्ह पा कर तमाम बाशिन्दों को निकाल दिया था।

13सिर्फ़ जसूरी और माकाती बाक़ी रह गए थे, और यह आज तक इस्राईलियों के दरमियान रहते हैं।

14सिर्फ़ लावी के क़बीले को कोई ज़मीन न मिली, क्यूँकि उन का मौरूसी हिस्सा जलने वाली वह क़ुर्बानियाँ हैं जो रब इस्राईल के ख़ुदा के लिए चढ़ाई जाती हैं। रब ने यही कुछ मूसा को बताया था।

रूबिन का क़बाइली इलाक़ा

15मूसा ने रूबिन के क़बीले को उस के कुंबों के मुताबिक़ ज़ैल का इलाक़ा दिया।

16वादी-ए-अर्नोन के किनारे पर शहर अरोईर और उसी वादी के बीच के शहर से ले कर मीदबा

17और हस्बोन तक। वहाँ के मैदान-ए-मुर्तफ़ा पर वाक़े तमाम शहर भी रूबिन के सपुर्द किए गए यानी दीबोन, बामात-बाल, बैत-बाल-मऊन,

18यहज़, क़दीमात, मिफ़ात,

19क़िर्यताइम, सिब्माह, ज़िरत-उस-सहर जो बहीरा-ए-मुर्दार के मशरिक़ में वाक़े पहाड़ी इलाक़े में है,

20बैत-फ़ग़ूर, पिसगा के पहाड़ी सिलसिले पर मौजूद आबादियाँ और बैत-यसीमोत।

21मैदान-ए-मुर्तफ़ा के तमाम शहर रूबिन के क़बीले को दिए गए यानी अमोरियों के बादशाह सीहोन की पूरी बादशाही जिस का दार-उल-हुकूमत हस्बोन शहर था। मूसा ने सीहोन को मार डाला था और उस के साथ पाँच मिदियानी रईसों को भी जिन्हें सीहोन ने अपने मुल्क में मुक़र्रर किया था। इन रईसों के नाम इवी, रक़म, सूर, हूर और रबा थे।

22जिन लोगों को उस वक़्त मारा गया उन में से बलआम बिन बओर भी था जो ग़ैबदान था।

23रूबिन के क़बीले की मग़रिबी सरहद दरया-ए-यर्दन थी। यही शहर और आबादियाँ रूबिन के क़बीले को उस के कुंबों के मुताबिक़ दी गईं, और वह उस की मीरास ठहरीं।

जद के क़बीले का इलाक़ा

24मूसा ने जद के क़बीले को उस के कुंबों के मुताबिक़ ज़ैल का इलाक़ा दिया।

25याज़ेर का इलाक़ा, जिलिआद के तमाम शहर, अम्मोनियों का आधा हिस्सा रब्बा के क़रीब शहर अरोईर तक

26और हस्बोन के बादशाह सीहोन की बादशाही का बाक़ी शिमाली हिस्सा यानी हस्बोन, रामत-उल-मिस्फ़ाह और बतूनीम के दरमियान का इलाक़ा और महनाइम और दबीर के दरमियान का इलाक़ा। इस के इलावा जद को वादी-ए-यर्दन का वह मशरिक़ी हिस्सा भी मिल गया जो बैत-हारम, बैत-निम्रा, सुक्कात और सफ़ोन पर मुश्तमिल था। यूँ उस की शिमाली सरहद किन्नरत यानी गलील की झील का जुनूबी किनारा था।

28यही शहर और आबादियाँ जद के क़बीले को उस के कुंबों के मुताबिक़ दी गईं, और वह उस की मीरास ठहरीं।

मनस्सी के मशरिक़ी हिस्से का इलाक़ा

29जो इलाक़ा मूसा ने मनस्सी के आधे हिस्से को उस के कुंबों के मुताबिक़ दिया था

30वह महनाइम से ले कर शिमाल में ओज बादशाह की तमाम बादशाही पर मुश्तमिल था। उस में मुल्क-ए-बसन और वह 60 आबादियाँ शामिल थीं जिन पर याईर ने फ़त्ह पाई थी।

31जिलिआद का आधा हिस्सा ओज की हुकूमत के दो मराकिज़ अस्तारात और इद्रई समेत मकीर बिन मनस्सी की औलाद को उस के कुंबों के मुताबिक़ दिया गया।

32मूसा ने इन मौरूसी ज़मीनों की तक़्सीम उस वक़्त की थी जब वह दरया-ए-यर्दन के मशरिक़ में मोआब के मैदानी इलाक़े में यरीहू शहर के मुक़ाबिल था।

33लेकिन लावी को मूसा से कोई मौरूसी ज़मीन नहीं मिली थी, क्यूँकि रब इस्राईल का ख़ुदा उन का मौरूसी हिस्सा है जिस तरह उस ने उन से वादा किया था।