कनआन की तक़्सीम
1इस्राईल के बाक़ी साढ़े नौ क़बीलों को दरया-ए-यर्दन के मग़रिब में यानी मुल्क-ए-कनआन में ज़मीन मिल गई। इस के लिए इलीअज़र इमाम, यशूअ बिन नून और क़बीलों के आबाई घरानों के सरबराहों ने
2क़ुरआ डाल कर मुक़र्रर किया कि हर क़बीले को कौन कौन सा इलाक़ा मिल जाए। यूँ वैसा ही हुआ जिस तरह रब ने मूसा को हुक्म दिया था।
3मूसा अढ़ाई क़बीलों को उन की मौरूसी ज़मीन दरया-ए-यर्दन के मशरिक़ में दे चुका था, क्यूँकि यूसुफ़ की औलाद के दो क़बीले मनस्सी और इफ़्राईम वुजूद में आए थे। लेकिन लावियों को उन के दरमियान ज़मीन न मिली। इस्राईलियों ने लावियों को ज़मीन न दी बल्कि उन्हें सिर्फ़ रिहाइश के लिए शहर और रेवड़ों के लिए चरागाहें दीं।
5यूँ उन्हों ने ज़मीन को उन ही हिदायात के मुताबिक़ तक़्सीम किया जो रब ने मूसा को दी थीं।
कालिब हब्रून पाने की गुज़ारिश करता है
6जिल्जाल में यहूदाह के क़बीले के मर्द यशूअ के पास आए। यफ़ुन्ना क़निज़्ज़ी का बेटा कालिब भी उन के साथ था। उस ने यशूअ से कहा, “आप को याद है कि रब ने मर्द-ए-ख़ुदा मूसा से आप के और मेरे बारे में क्या कुछ कहा जब हम क़ादिस-बर्नीअ में थे।
7मैं 40 साल का था जब रब के ख़ादिम मूसा ने मुझे मुल्क-ए-कनआन का जाइज़ा लेने के लिए क़ादिस-बर्नीअ से भेज दिया। जब वापस आया तो मैं ने मूसा को दियानतदारी से सब कुछ बताया जो देखा था।
8अफ़्सोस कि जो भाई मेरे साथ गए थे उन्हों ने लोगों को डराया। लेकिन मैं रब अपने ख़ुदा का वफ़ादार रहा।
9उस दिन मूसा ने क़सम खा कर मुझ से वादा किया, ‘जिस ज़मीन पर तेरे पाँओ चले हैं वह हमेशा तक तेरी और तेरी औलाद की विरासत में रहेगी। क्यूँकि तू रब मेरे ख़ुदा का वफ़ादार रहा है।’
10और अब ऐसा ही हुआ है जिस तरह रब ने वादा किया था। उस ने मुझे अब तक ज़िन्दा रहने दिया है। रब को मूसा से यह बात किए 45 साल गुज़र गए हैं। उस सारे अर्से में हम रेगिस्तान में घूमते फिरते रहे हैं। आज मैं 85 साल का हूँ,
11और अब तक उतना ही ताक़तवर हूँ जितना कि उस वक़्त था जब मैं जासूस था। अब तक मेरी बाहर निकलने और जंग करने की वही क़ुव्वत क़ाइम है।
12अब मुझे वह पहाड़ी इलाक़ा दे दें जिस का वादा रब ने उस दिन मुझ से किया था। आप ने ख़ुद सुना है कि अनाक़ी वहाँ बड़े क़िलाबन्द शहरों में बसते हैं। लेकिन शायद रब मेरे साथ हो और मैं उन्हें निकाल दूँ जिस तरह उस ने फ़रमाया है।”
13तब यशूअ ने कालिब बिन यफ़ुन्ना को बरकत दे कर उसे विरासत में हब्रून दे दिया।
14पहले हब्रून क़िर्यत-अर्बा यानी अर्बा का शहर कहलाता था। अर्बा अनाक़ियों का सब से बड़ा आदमी था। आज तक यह शहर कालिब की औलाद की मिलकियत रही है। वजह यह है कि कालिब रब इस्राईल के ख़ुदा का वफ़ादार रहा। फिर जंग ख़त्म हुई, और मुल्क में अम्न-ओ-अमान क़ाइम हो गया।