यसायाह 54:1-17 DGV - Bible AI

रब ने यरूशलम को दुबारा क़बूल कर लिया है

1रब फ़रमाता है, “ख़ुशी के नारे लगा, तू जो बेऔलाद है, जो बच्चे को जन्म ही नहीं दे सकती। बुलन्द आवाज़ से शादियाना बजा, तू जिसे पैदाइश का दर्द न हुआ। क्यूँकि अब तर्क की हुई औरत के बच्चे शादीशुदा औरत के बच्चों से ज़्यादा हैं।

2अपने ख़ैमे को बड़ा बना, उस के पर्दे हर तरफ़ बिछा! बचत मत करना! ख़ैमे के रस्से लम्बे लम्बे करके मेख़ें मज़बूती से ज़मीन में ठोंक दे।

3क्यूँकि तू तेज़ी से दाईं और बाईं तरफ़ फैल जाएगी, और तेरी औलाद दीगर क़ौमों पर क़ब्ज़ा करके तबाहशुदा शहरों को अज़ सर-ए-नौ आबाद करेगी।

4मत डरना, तेरी रुस्वाई नहीं होगी। शर्मसार न हो, तेरी बेहुरमती नहीं होगी। अब तू अपनी जवानी की शर्मिन्दगी भूल जाएगी, तेरे ज़हन से बेवा होने की ज़िल्लत उतर जाएगी।

5क्यूँकि तेरा ख़ालिक़ तेरा शौहर है, रब्ब-उल-अफ़्वाज उस का नाम है, और तेरा छुड़ाने वाला इस्राईल का क़ुद्दूस है, जो पूरी दुनिया का ख़ुदा कहलाता है।”

6तेरा ख़ुदा फ़रमाता है, “तू मतरूका और दिल से मजरूह बीवी की मानिन्द है, उस औरत की मानिन्द जिस के शौहर ने उसे रद्द किया, गो उस की शादी उस वक़्त हुई जब कुंवारी ही थी। लेकिन अब मैं, रब ने तुझे बुलाया है।

7एक ही लम्हे के लिए मैं ने तुझे तर्क किया, लेकिन अब बड़े रहम से तुझे जमा करूँगा।

8मैं ने अपने ग़ज़ब का पूरा ज़ोर तुझ पर नाज़िल करके पल भर के लिए अपना चेहरा तुझ से छुपा लिया, लेकिन अब अबदी शफ़्क़त से तुझ पर रहम करूँगा।” रब तेरा छुड़ाने वाला यह फ़रमाता है।

9“बड़े सैलाब के बाद मैं ने नूह से क़सम खाई थी कि आइन्दा सैलाब कभी पूरी ज़मीन पर नहीं आएगा। इसी तरह अब मैं क़सम खा कर वादा करता हूँ कि आइन्दा न मैं कभी तुझ से नाराज़ हूँगा, न तुझे मलामत करूँगा।

10गो पहाड़ हट जाएँ और पहाड़ियाँ जुम्बिश खाएँ, लेकिन मेरी शफ़्क़त तुझ पर से कभी नहीं हटेगी, मेरा सलामती का अह्द कभी नहीं हिलेगा।” यह रब का फ़रमान है जो तुझ पर तरस खाता है।

नया शहर यरूशलम

11“बेचारी बेटी यरूशलम! शदीद तूफ़ान तुझ पर से गुज़र गए हैं, और कोई नहीं है जो तुझे तसल्ली दे। देख, मैं तेरी दीवारों के पत्थर मज़बूत चूने से जोड़ दूँगा और तेरी बुन्यादों को संग-ए-लाजवर्द[२३] से रख दूँगा।

12मैं तेरी दीवारों को याक़ूत, तेरे दरवाज़ों को आब-ए-बहर[२४] और तेरी तमाम फ़सील को क़ीमती जवाहिर से तामीर करूँगा।

13तेरे तमाम फ़र्ज़न्द रब से तालीम पाएँगे, और तेरी औलाद की सलामती अज़ीम होगी।

14तुझे इन्साफ़ की मज़बूत बुन्याद पर रखा जाएगा, चुनाँचे दूसरों के ज़ुल्म से दूर रह, क्यूँकि डरने की ज़रूरत नहीं होगी। दह्शतज़दा न हो, क्यूँकि दह्शत खाने का सबब तेरे क़रीब नहीं आएगा।

15अगर कोई तुझ पर हम्ला करे भी तो यह मेरी तरफ़ से नहीं होगा, इस लिए हर हम्लाआवर शिकस्त खाएगा।

16देख, मैं ही उस लोहार का ख़ालिक़ हूँ जो हवा दे कर कोएलों को दहका देता है ताकि काम के लिए मौज़ूँ हथियार बना ले। और मैं ही ने तबाह करने वाले को ख़ल्क़ किया ताकि वह बर्बादी का काम अन्जाम दे।

17चुनाँचे जो भी हथियार तुझ पर हम्ला करने के लिए तय्यार हो जाए वह नाकाम होगा, और जो भी ज़बान तुझ पर इल्ज़ाम लगाए उसे तू मुजरिम साबित करेगी। यही रब के ख़ादिमों का मौरूसी हिस्सा है, मैं ही उन की रास्तबाज़ी बरक़रार रखूँगा।” रब ख़ुद यह फ़रमाता है।