यरूशलम का अन्जाम
1उस सरकश, नापाक और ज़ालिम शहर पर अफ़्सोस जो यरूशलम कहलाता है।
2न वह सुनता, न तर्बियत क़बूल करता है। न वह रब पर भरोसा रखता, न अपने ख़ुदा के क़रीब आता है।
3जो बुज़ुर्ग उस के बीच में हैं वह दहाड़ते हुए शेरबबर हैं। उस के क़ाज़ी शाम के वक़्त भूके फिरने वाले भेड़ीए हैं जो तुलू-ए-सुब्ह तक शिकार की एक हड्डी तक नहीं छोड़ते।
4उस के नबी गुस्ताख़ और ग़द्दार हैं। उस के इमाम मक़्दिस की बेहुरमती और शरीअत से ज़ियादती करते हैं।
5लेकिन रब भी शहर के बीच में है, और वह रास्त है, वह बेइन्साफ़ी नहीं करता। सुब्ह-ब-सुब्ह वह अपना इन्साफ़ क़ाइम रखता है, हम कभी उस से महरूम नहीं रहते। लेकिन बेदीन शर्म से वाक़िफ़ ही नहीं होता।
6रब फ़रमाता है, “मैं ने क़ौमों को नेस्त-ओ-नाबूद कर दिया है। उन के क़िले तबाह, उन की गलियाँ सुन्सान हैं। अब उन में से कोई नहीं गुज़रता। उन के शहर इतने बर्बाद हैं कि कोई भी उन में नहीं रहता।
7मैं बोला, ‘बेशक यरूशलम मेरा ख़ौफ़ मान कर मेरी तर्बियत क़बूल करेगा। क्यूँकि क्या ज़रूरत है कि उस की रिहाइशगाह मिट जाए और मेरी तमाम सज़ाएँ उस पर नाज़िल हो जाएँ।’ लेकिन उस के बाशिन्दे मज़ीद जोश के साथ अपनी बुरी हरकतों में लग गए।”
8चुनाँचे रब फ़रमाता है, “अब मेरे इन्तिज़ार में रहो, उस दिन के इन्तिज़ार में जब मैं शिकार करने के लिए उठूँगा।
इस्राईल के लिए नई उम्मीद
9लेकिन इस के बाद मैं अक़्वाम के होंटों को पाक-साफ़ करूँगा ताकि वह आइन्दा रब का नाम ले कर इबादत करें, कि वह शाना-ब-शाना खड़ी हो कर मेरी ख़िदमत करें।
10उस वक़्त मेरे परस्तार, मेरी मुन्तशिर हुई क़ौम एथोपिया के दरयाओं के पार से भी आ कर मुझे क़ुर्बानियाँ पेश करेगी।
11ऐ सिय्यून बेटी, उस दिन तुझे शर्मसार नहीं होना पड़ेगा हालाँकि तू ने मुझ से बेवफ़ा हो कर निहायत बुरे काम किए हैं। क्यूँकि मैं तेरे दरमियान से तेरे मुतकब्बिर शेख़ीबाज़ों को निकालूँगा। आइन्दा तू मेरे मुक़द्दस पहाड़ पर मग़रूर नहीं होगी।
12मैं तुझ में सिर्फ़ क़ौम के ग़रीबों और ज़रूरतमन्दों को छोड़ूँगा, उन सब को जो रब के नाम में पनाह लेंगे।
13इस्राईल का यह बचा हुआ हिस्सा न ग़लत काम करेगा, न झूट बोलेगा। उन की ज़बान पर फ़रेब नहीं होगा। तब वह भेड़ों की तरह चरागाह में चरेंगे और आराम करेंगे। उन्हें डराने वाला कोई नहीं होगा।”
14ऐ सिय्यून बेटी, ख़ुशी के नारे लगा! ऐ इस्राईल, ख़ुशी मना! ऐ यरूशलम बेटी, शादमान हो, पूरे दिल से शादियाना बजा।
15क्यूँकि रब ने तेरी सज़ा मिटा कर तेरे दुश्मन को भगा दिया है। रब जो इस्राईल का बादशाह है तेरे दरमियान ही है। आइन्दा तुझे किसी नुक़्सान से डरने की ज़रूरत नहीं होगी।
16उस दिन लोग यरूशलम से कहेंगे, “ऐ सिय्यून, मत डरना! हौसला न हार, तेरे हाथ ढीले न हों।
17रब तेरा ख़ुदा तेरे दरमियान है, तेरा पहलवान तुझे नजात देगा। वह शादमान हो कर तेरी ख़ुशी मनाएगा। उस की मुहब्बत तेरे क़ुसूर का ज़िक्र ही नहीं करेगी बल्कि वह तुझ से इन्तिहाई ख़ुश हो कर शादियाना बजाएगा।”
18रब फ़रमाता है, “मैं ईद को तर्क करने वालों को तुझ से दूर कर दूँगा, क्यूँकि वह तेरी रुस्वाई का बाइस थे।
19मैं उन से भी निपट लूँगा जो तुझे कुचल रहे हैं। जो लंगड़ाता है उसे मैं बचाऊँगा, जो मुन्तशिर हैं उन्हें जमा करूँगा। जिस मुल्क में भी उन की रुस्वाई हुई वहाँ मैं उन की तारीफ़ और एहतिराम कराऊँगा।
20उस वक़्त मैं तुम्हें जमा करके वतन में वापस लाऊँगा। मैं तुम्हारे देखते देखते तुम्हें बहाल करूँगा और दुनिया की तमाम अक़्वाम में तुम्हारी तारीफ़ और एहतिराम कराऊँगा।” यह रब का फ़रमान है।