हिज़्क़ीएल 22:1-31 DGV - Bible AI

यरूशलम ख़ूँरेज़ी का शहर है

1रब का कलाम मुझ पर नाज़िल हुआ,

2“ऐ आदमज़ाद, क्या तू यरूशलम की अदालत करने के लिए तय्यार है? क्या तू इस क़ातिल शहर पर फ़ैसला करने के लिए मुस्तइद है? फिर उस पर उस की मकरूह हरकतें ज़ाहिर कर।

3उसे बता,

3‘रब क़ादिर-ए-मुतलक़ फ़रमाता है कि ऐ यरूशलम बेटी, तेरा अन्जाम क़रीब ही है, और यह तेरा अपना क़ुसूर है। क्यूँकि तू ने अपने दरमियान मासूमों का ख़ून बहाया और अपने लिए बुत बना कर अपने आप को नापाक कर दिया है।

4अपनी ख़ूँरेज़ी से तू मुजरिम बन गई है, अपनी बुतपरस्ती से नापाक हो गई है। तू ख़ुद अपनी अदालत का दिन क़रीब लाई है। इसी वजह से तेरा अन्जाम क़रीब आ गया है, इसी लिए मैं तुझे दीगर अक़्वाम की लान-तान और तमाम ममालिक के मज़ाक़ का निशाना बना दूँगा।

5सब तुझ पर ठट्ठा मारेंगे, ख़्वाह वह क़रीब हों या दूर। तेरे नाम पर दाग़ लग गया है, तुझ में फ़साद हद से ज़्यादा बढ़ गया है।

6इस्राईल का जो भी बुज़ुर्ग तुझ में रहता है वह अपनी पूरी ताक़त से ख़ून बहाने की कोशिश करता है।

7तेरे बाशिन्दे अपने माँ-बाप को हक़ीर जानते हैं। वह परदेसी पर सख़्ती करके यतीमों और बेवाओं पर ज़ुल्म करते हैं।

8जो मुझे मुक़द्दस है उसे तू पाँओ तले कुचल देती है। तू मेरे सबत के दिनों की बेहुरमती भी करती है।

9तुझ में ऐसे तोहमत लगाने वाले हैं जो ख़ूँरेज़ी पर तुले हुए हैं। तेरे बाशिन्दे पहाड़ों की नाजाइज़ क़ुर्बानगाहों के पास क़ुर्बानियाँ खाते और तेरे दरमियान शर्मनाक हरकतें करते हैं।

10बेटा माँ से हमबिसतर हो कर बाप की बेहुरमती करता है, शौहर माहवारी के दौरान बीवी से सोह्बत करके उस से ज़ियादती करता है।

11एक अपने पड़ोसी की बीवी से ज़िना करता है जबकि दूसरा अपनी बहू की बेहुरमती और तीसरा अपनी सगी बहन की इस्मतदरी करता है।

12तुझ में ऐसे लोग हैं जो रिश्वत के इवज़ क़त्ल करते हैं। सूद क़ाबिल-ए-क़बूल है, और लोग एक दूसरे पर ज़ुल्म करके नाजाइज़ नफ़ा कमाते हैं। रब क़ादिर-ए-मुतलक़ फ़रमाता है कि ऐ यरूशलम, तू मुझे सरासर भूल गई है!

13तेरा नाजाइज़ नफ़ा और तेरे बीच में ख़ूँरेज़ी देख कर मैं ग़ुस्से में ताली बजाता हूँ।

14सोच ले! जिस दिन मैं तुझ से निपटूँगा तो क्या तेरा हौसला क़ाइम और तेरे हाथ मज़बूत रहेंगे? यह मेरा, रब का फ़रमान है, और मैं यह करूँगा भी।

15मैं तुझे दीगर अक़्वाम-ओ-ममालिक में मुन्तशिर करके तेरी नापाकी दूर करूँगा।

16फिर जब दीगर क़ौमों के देखते देखते तेरी बेहुरमती हो जाएगी तब तू जान लेगी कि मैं ही रब हूँ’।”

इस्राईली क़ौम भट्टी में धात का मैल है

17रब मज़ीद मुझ से हमकलाम हुआ,

18“ऐ आदमज़ाद, इस्राईली क़ौम मेरे नज़्दीक उस मैल की मानिन्द बन गई है जो चाँदी को ख़ालिस करने के बाद भट्टी में बाक़ी रह जाता है। सब के सब उस ताँबे, टीन, लोहे और सीसे की मानिन्द हैं जो भट्टी में रह जाता है। वह कचरा ही हैं।

19चुनाँचे रब क़ादिर-ए-मुतलक़ फ़रमाता है कि चूँकि तुम भट्टी में बचा हुआ मैल हो इस लिए मैं तुम्हें यरूशलम में इकट्ठा करके

20भट्टी में फैंक दूँगा। जिस तरह चाँदी, ताँबे, लोहे, सीसे और टीन की आमेज़िश को तपती भट्टी में फैंका जाता है ताकि पिघल जाए उसी तरह मैं तुम्हें ग़ुस्से में इकट्ठा करूँगा और भट्टी में फैंक कर पिघला दूँगा।

21मैं तुम्हें जमा करके आग में फैंक दूँगा और बड़े ग़ुस्से से हवा दे कर तुम्हें पिघला दूँगा।

22जिस तरह चाँदी भट्टी में पिघल जाती है उसी तरह तुम यरूशलम में पिघल जाओगे। तब तुम जान लोगे कि मैं रब ने अपना ग़ज़ब तुम पर नाज़िल किया है।”

पूरी क़ौम क़ुसूरवार है

23रब मुझ से हमकलाम हुआ,

24“ऐ आदमज़ाद, मुल्क-ए-इस्राईल को बता, ‘ग़ज़ब के दिन तुझ पर मेंह नहीं बरसेगा बल्कि तू बारिश से महरूम रहेगा।’

25मुल्क के बीच में साज़िश करने वाले राहनुमा शेरबबर की मानिन्द हैं जो दहाड़ते दहाड़ते अपना शिकार फाड़ लेते हैं। वह लोगों को हड़प करके उन के ख़ज़ाने और क़ीमती चीज़ें छीन लेते और मुल्क के दरमियान ही मुतअद्दिद औरतों को बेवाएँ बना देते हैं।

26मुल्क के इमाम मेरी शरीअत से ज़ियादती करके उन चीज़ों की बेहुरमती करते हैं जो मुझे मुक़द्दस हैं। न वह मुक़द्दस और आम चीज़ों में इम्तियाज़ करते, न पाक और नापाक अश्या का फ़र्क़ सिखाते हैं। नीज़, वह मेरे सबत के दिन अपनी आँखों को बन्द रखते हैं ताकि उस की बेहुरमती नज़र न आए। यूँ उन के दरमियान ही मेरी बेहुरमती की जाती है।

27मुल्क के दरमियान के बुज़ुर्ग भेड़ियों की मानिन्द हैं जो अपने शिकार को फाड़ फाड़ कर ख़ून बहाते और लोगों को मौत के घाट उतारते हैं ताकि नारवा नफ़ा कमाएँ।

28मुल्क के नबी फ़रेबदिह रोयाएँ और झूटे पैग़ामात सुना कर लोगों के बुरे कामों पर सफेदी फेर देते हैं ताकि उन की ग़लतियाँ नज़र न आएँ। वह कहते हैं, ‘रब क़ादिर-ए-मुतलक़ फ़रमाता है’ हालाँकि रब ने उन पर कुछ नाज़िल नहीं किया होता।

29मुल्क के आम लोग भी एक दूसरे का इस्तेह्साल करते हैं। वह डकैत बन कर ग़रीबों और ज़रूरतमन्दों पर ज़ुल्म करते और परदेसियों से बदसुलूकी करके उन का हक़ मारते हैं।

30इस्राईल में मैं ऐसे आदमी की तलाश में रहा जो मुल्क के लिए हिफ़ाज़ती चारदीवारी तामीर करे, जो मेरे हुज़ूर आ कर दीवार के रख़ने में खड़ा हो जाए ताकि मैं मुल्क को तबाह न करूँ। लेकिन मुझे एक भी न मिला जो इस क़ाबिल हो।

31चुनाँचे मैं अपना ग़ज़ब उन पर नाज़िल करूँगा और उन्हें अपने सख़्त क़हर से भस्म करूँगा। तब उन के ग़लत कामों का नतीजा उन के अपने सरों पर आएगा। यह रब क़ादिर-ए-मुतलक़ का फ़रमान है।”