हड्डियों से भरी वादी की रोया
1एक दिन रब का हाथ मुझ पर आ ठहरा। रब ने मुझे अपने रूह से बाहर ले जा कर एक खुली वादी के बीच में खड़ा किया। वादी हड्डियों से भरी थी।
2उस ने मुझे उन में से गुज़रने दिया तो मैं ने देखा कि वादी की ज़मीन पर बेशुमार हड्डियाँ बिखरी पड़ी हैं। यह हड्डियाँ सरासर सूखी हुई थीं।
3रब ने मुझ से पूछा, “ऐ आदमज़ाद, क्या यह हड्डियाँ दुबारा ज़िन्दा हो सकती हैं?” मैं ने जवाब दिया, “ऐ रब क़ादिर-ए-मुतलक़, तू ही जानता है।”
4तब उस ने फ़रमाया, “नबुव्वत करके हड्डियों को बता, ‘ऐ सूखी हुई हड्डियो, रब का कलाम सुनो!
5रब क़ादिर-ए-मुतलक़ फ़रमाता है कि मैं तुम में दम डालूँगा तो तुम दुबारा ज़िन्दा हो जाओगी।
6मैं तुम पर नसें और गोश्त चढ़ा कर सब कुछ जिल्द से ढाँप दूँगा। मैं तुम में दम डाल दूँगा, और तुम ज़िन्दा हो जाओगी। तब तुम जान लोगी कि मैं ही रब हूँ’।”
7मैं ने ऐसा ही किया। और जूँ ही मैं नबुव्वत करने लगा तो शोर मच गया। हड्डियाँ खड़खड़ाते हुए एक दूसरी के साथ जुड़ गईं, और होते होते पूरे ढाँचे बन गए।
8मेरे देखते देखते नसें और गोश्त ढाँचों पर चढ़ गया और सब कुछ जिल्द से ढाँपा गया। लेकिन अब तक जिस्मों में दम नहीं था।
9फिर रब ने फ़रमाया, “ऐ आदमज़ाद, नबुव्वत करके दम से मुख़ातिब हो जा, ‘ऐ दम, रब क़ादिर-ए-मुतलक़ फ़रमाता है कि चारों तरफ़ से आ कर मक़्तूलों पर फूँक मार ताकि दुबारा ज़िन्दा हो जाएँ’।”
10मैं ने ऐसा ही किया तो मक़्तूलों में दम आ गया, और वह ज़िन्दा हो कर अपने पाँओ पर खड़े हो गए। एक निहायत बड़ी फ़ौज वुजूद में आ गई थी!
11तब रब ने फ़रमाया, “ऐ आदमज़ाद, यह हड्डियाँ इस्राईली क़ौम के तमाम अफ़राद हैं। वह कहते हैं, ‘हमारी हड्डियाँ सूख गई हैं, हमारी उम्मीद जाती रही है। हम ख़त्म ही हो गए हैं!’
12चुनाँचे नबुव्वत करके उन्हें बता,
13ऐ मेरी क़ौम, जब मैं तुम्हारी क़ब्रों को खोल दूँगा और तुम्हें उन में से निकाल लाऊँगा तब तुम जान लोगे कि मैं ही रब हूँ।
14मैं अपना रूह तुम में डाल दूँगा तो तुम ज़िन्दा हो जाओगे। फिर मैं तुम्हें तुम्हारे अपने मुल्क में बसा दूँगा। तब तुम जान लोगे कि यह मेरा, रब का फ़रमान है और मैं यह करूँगा भी’।”
यहूदाह और इस्राईल मुत्तहिद हो जाएंगे
15रब मुझ से हमकलाम हुआ,
16“ऐ आदमज़ाद, लकड़ी का टुकड़ा ले कर उस पर लिख दे, ‘जुनूबी क़बीला यहूदाह और जितने इस्राईली क़बीले उस के साथ मुत्तहिद हैं।’ फिर लकड़ी का एक और टुकड़ा ले कर उस पर लिख दे, ‘शिमाली क़बीला यूसुफ़ यानी इफ़्राईम और जितने इस्राईली क़बीले उस के साथ मुत्तहिद हैं।’
17अब लकड़ी के दोनों टुकड़े एक दूसरे के साथ यूँ जोड़ दे कि तेरे हाथ में एक हो जाएँ।
18तेरे हमवतन तुझ से पूछेंगे, ‘क्या आप हमें इस का मतलब नहीं बताएँगे?’
19तब उन्हें बता, ‘रब क़ादिर-ए-मुतलक़ फ़रमाता है कि मैं यूसुफ़ यानी लकड़ी के मालिक इफ़्राईम और उस के साथ मुत्तहिद इस्राईली क़बीलों को ले कर यहूदाह की लकड़ी के साथ जोड़ दूँगा। मेरे हाथ में वह लकड़ी का एक ही टुकड़ा बन जाएंगे।’
20अपने हमवतनों की मौजूदगी में लकड़ी के मज़कूरा टुकड़े हाथ में थामे रख
21और साथ साथ उन्हें बता, ‘रब क़ादिर-ए-मुतलक़ फ़रमाता है कि मैं इस्राईलियों को उन क़ौमों में से निकाल लाऊँगा जहाँ वह जा बसे हैं। मैं उन्हें जमा करके उन के अपने मुल्क में वापस लाऊँगा।
22वहीं इस्राईल के पहाड़ों पर मैं उन्हें मुत्तहिद करके एक ही क़ौम बना दूँगा। उन पर एक ही बादशाह हुकूमत करेगा। आइन्दा वह न कभी दो क़ौमों में तक़्सीम हो जाएंगे, न दो सल्तनतों में।
23आइन्दा वह अपने आप को न अपने बुतों या बाक़ी मकरूह चीज़ों से नापाक करेंगे, न उन गुनाहों से जो अब तक करते आए हैं। मैं उन्हें उन तमाम मक़ामों से निकाल कर छुड़ाऊँगा जिन में उन्हों ने गुनाह किया है। मैं उन्हें पाक-साफ़ करूँगा। यूँ वह मेरी क़ौम होंगे और मैं उन का ख़ुदा हूँगा।
24मेरा ख़ादिम दाऊद उन का बादशाह होगा, उन का एक ही गल्लाबान होगा। तब वह मेरी हिदायात के मुताबिक़ ज़िन्दगी गुज़ारेंगे और ध्यान से मेरे अह्काम पर अमल करेंगे।
25जो मुल्क मैं ने अपने ख़ादिम याक़ूब को दिया था और जिस में तुम्हारे बापदादा रहते थे उस में इस्राईली दुबारा बसेंगे। हाँ, वह और उन की औलाद हमेशा तक उस में आबाद रहेंगे, और मेरा ख़ादिम दाऊद अबद तक उन पर हुकूमत करेगा।
26तब मैं उन के साथ सलामती का अह्द बांधूँगा, एक ऐसा अह्द जो हमेशा तक क़ाइम रहेगा। मैं उन्हें क़ाइम करके उन की तादाद बढ़ाता जाऊँगा, और मेरा मक़्दिस अबद तक उन के दरमियान रहेगा।
27वह मेरी सुकूनतगाह के साय में बसेंगे। मैं उन का ख़ुदा हूँगा, और वह मेरी क़ौम होंगे।
28जब मेरा मक़्दिस अबद तक उन के दरमियान होगा तो दीगर अक़्वाम जान लेंगी कि मैं ही रब हूँ, कि इस्राईल को मुक़द्दस करने वाला मैं ही हूँ’।”