हिज़्क़ीएल 40:1-49 DGV - Bible AI

रब के नए घर की रोया

1हमारी जिलावतनी के 25वें साल में रब का हाथ मुझ पर आ ठहरा और वह मुझे यरूशलम ले गया। महीने का दसवाँ दिन[२८] था। उस वक़्त यरूशलम को दुश्मन के क़ब्ज़े में आए 14 साल हो गए थे।

2इलाही रोयाओं में अल्लाह ने मुझे मुल्क-ए-इस्राईल के एक निहायत बुलन्द पहाड़ पर पहुँचाया। पहाड़ के जुनूब में मुझे एक शहर सा नज़र आया।

3अल्लाह मुझे शहर के क़रीब ले गया तो मैं ने शहर के दरवाज़े में खड़े एक आदमी को देखा जो पीतल का बना हुआ लग रहा था। उस के हाथ में कतान की रस्सी और फ़ीता था।

4उस ने मुझ से कहा, “ऐ आदमज़ाद, ध्यान से देख, ग़ौर से सुन! जो कुछ भी मैं तुझे दिखाऊँगा, उस पर तवज्जुह दे। क्यूँकि तुझे इसी लिए यहाँ लाया गया है कि मैं तुझे यह दिखाऊँ। जो कुछ भी तू देखे उसे इस्राईली क़ौम को सुना दे!”

रब के घर के बैरूनी सहन का मशरिक़ी दरवाज़ा

5मैं ने देखा कि रब के घर का सहन चारदीवारी से घिरा हुआ है। जो फ़ीता मेरे राहनुमा के हाथ में था उस की लम्बाई साढ़े 10 फ़ुट थी। इस के ज़रीए उस ने चारदीवारी को नाप लिया। दीवार की मोटाई और ऊँचाई दोनों साढ़े दस दस फ़ुट थी।

6फिर मेरा राहनुमा मशरिक़ी दरवाज़े के पास पहुँचाने वाली सीढ़ी पर चढ़ कर दरवाज़े की दहलीज़ पर रुक गया। जब उस ने उस की पैमाइश की तो उस की गहराई साढ़े 10 फ़ुट निकली।

7जब वह दरवाज़े में खड़ा हुआ तो दाईं और बाईं तरफ़ पहरेदारों के तीन तीन कमरे नज़र आए। हर कमरे की लम्बाई और चौड़ाई साढ़े दस दस फ़ुट थी। कमरों के दरमियान की दीवार पौने नौ फ़ुट मोटी थी। इन कमरों के बाद एक और दहलीज़ थी जो साढ़े 10 फ़ुट गहरी थी। उस पर से गुज़र कर हम दरवाज़े से मुल्हिक़ एक बरामदे में आए जिस का रुख़ रब के घर की तरफ़ था।

8मेरे राहनुमा ने बरामदे की पैमाइश की

9तो पता चला कि उस की लम्बाई 14 फ़ुट है। दरवाज़े के सतून-नुमा बाज़ू साढ़े तीन तीन फ़ुट मोटे थे। बरामदे का रुख़ रब के घर की तरफ़ था।

10पहरेदारों के मज़कूरा कमरे सब एक जैसे बड़े थे, और उन के दरमियान वाली दीवारें सब एक जैसी मोटी थीं।

11इस के बाद उस ने दरवाज़े की गुज़रगाह की चौड़ाई नापी। यह मिल मिला कर पौने 23 फ़ुट थी, अलबत्ता जब किवाड़ खुले थे तो उन के दरमियान का फ़ासिला साढ़े 17 फ़ुट था।

12पहरेदारों के हर कमरे के सामने एक छोटी सी दीवार थी जिस की ऊँचाई 21 इंच थी जबकि हर कमरे की लम्बाई और ऊँचाई साढ़े दस दस फ़ुट थी।

13फिर मेरे राहनुमा ने वह फ़ासिला नापा जो इन कमरों में से एक की पिछली दीवार से ले कर उस के मुक़ाबिल के कमरे की पिछली दीवार तक था। मालूम हुआ कि पौने 44 फ़ुट है।

14सहन में दरवाज़े से मुल्हिक़ वह बरामदा था जिस का रुख़ रब के घर की तरफ़ था। उस की चौड़ाई 33 फ़ुट थी।[२९]

15जो बाहर से दरवाज़े में दाख़िल होता था वह साढ़े 87 फ़ुट के बाद ही सहन में पहुँचता था।

16पहरेदारों के तमाम कमरों में छोटी खिड़कियाँ थीं। कुछ बैरूनी दीवार में थीं, कुछ कमरों के दरमियान की दीवारों में। दरवाज़े के सतून-नुमा बाज़ूओं में खजूर के दरख़्त मुनक़्क़श थे।

रब के घर का बैरूनी सहन

17फिर मेरा राहनुमा दरवाज़े में से गुज़र कर मुझे रब के घर के बैरूनी सहन में लाया। चारदीवारी के साथ साथ 30 कमरे बनाए गए थे जिन के सामने पत्थर का फ़र्श था।

18यह फ़र्श चारदीवारी के साथ साथ था। जहाँ दरवाज़ों की गुज़रगाहें थीं वहाँ फ़र्श उन की दीवारों से लगता था। जितना लम्बा इन गुज़रगाहों का वह हिस्सा था जो सहन में था उतना ही चौड़ा फ़र्श भी था। यह फ़र्श अन्दरूनी सहन की निस्बत नीचा था।

19बैरूनी और अन्दरूनी सहनों के दरमियान भी दरवाज़ा था। यह बैरूनी दरवाज़े के मुक़ाबिल था। जब मेरे राहनुमा ने दोनों दरवाज़ों का दरमियानी फ़ासिला नापा तो मालूम हुआ कि 175 फ़ुट है।

बैरूनी सहन का शिमाली दरवाज़ा

20इस के बाद उस ने चारदीवारी के शिमाली दरवाज़े की पैमाइश की।

21इस दरवाज़े में भी दाईं और बाईं तरफ़ तीन तीन कमरे थे जो मशरिक़ी दरवाज़े के कमरों जितने बड़े थे। उस में से गुज़र कर हम वहाँ भी दरवाज़े से मुल्हिक़ बरामदे में आए जिस का रुख़ रब के घर की तरफ़ था। उस की और उस के सतून-नुमा बाज़ूओं की लम्बाई और चौड़ाई उतनी ही थी जितनी मशरिक़ी दरवाज़े के बरामदे और उस के सतून-नुमा बाज़ूओं की थी। गुज़रगाह की पूरी लम्बाई साढ़े 87 फ़ुट थी। जब मेरे राहनुमा ने वह फ़ासिला नापा जो पहरेदारों के कमरों में से एक की पिछली दीवार से ले कर उस के मुक़ाबिल के कमरे की पिछली दीवार तक था तो मालूम हुआ कि पौने 44 फ़ुट है।

22दरवाज़े से मुल्हिक़ बरामदा, खिड़कियाँ और कन्दा किए गए खजूर के दरख़्त उसी तरह बनाए गए थे जिस तरह मशरिक़ी दरवाज़े में। बाहर एक सीढ़ी दरवाज़े तक पहुँचाती थी जिस के सात क़दम्चे थे। मशरिक़ी दरवाज़े की तरह शिमाली दरवाज़े के अन्दरूनी सिरे के साथ एक बरामदा मुल्हिक़ था जिस से हो कर इन्सान सहन में पहुँचता था।

23मशरिक़ी दरवाज़े की तरह इस दरवाज़े के मुक़ाबिल भी अन्दरूनी सहन में पहुँचाने वाला दरवाज़ा था। दोनों दरवाज़ों का दरमियानी फ़ासिला 175 फ़ुट था।

बैरूनी सहन का जुनूबी दरवाज़ा

24इस के बाद मेरा राहनुमा मुझे बाहर ले गया। चलते चलते हम जुनूबी चारदीवारी के पास पहुँचे। वहाँ भी दरवाज़ा नज़र आया। उस में से गुज़र कर हम वहाँ भी दरवाज़े से मुल्हिक़ बरामदे में आए जिस का रुख़ रब के घर की तरफ़ था। यह बरामदा दरवाज़े के सतून-नुमा बाज़ूओं समेत दीगर दरवाज़ों के बरामदे जितना बड़ा था।

25दरवाज़े और बरामदे की खिड़कियाँ भी दीगर खिड़कियों की मानिन्द थीं। गुज़रगाह की पूरी लम्बाई साढ़े 87 फ़ुट थी। जब उस ने वह फ़ासिला नापा जो पहरेदारों के कमरों में से एक की पिछली दीवार से ले कर उस के मुक़ाबिल के कमरे की पिछली दीवार तक था तो मालूम हुआ कि पौने 44 फ़ुट है।

26बाहर एक सीढ़ी दरवाज़े तक पहुँचाती थी जिस के सात क़दम्चे थे। दीगर दरवाज़ों की तरह जुनूबी दरवाज़े के अन्दरूनी सिरे के साथ बरामदा मुल्हिक़ था जिस से हो कर इन्सान सहन में पहुँचता था। बरामदे के दोनों सतून-नुमा बाज़ूओं पर खजूर के दरख़्त कन्दा किए गए थे।

27इस दरवाज़े के मुक़ाबिल भी अन्दरूनी सहन में पहुँचाने वाला दरवाज़ा था। दोनों दरवाज़ों का दरमियानी फ़ासिला 175 फ़ुट था।

अन्दरूनी सहन का जुनूबी दरवाज़ा

28फिर मेरा राहनुमा जुनूबी दरवाज़े में से गुज़र कर मुझे अन्दरूनी सहन में लाया। जब उस ने वहाँ का दरवाज़ा नापा तो मालूम हुआ कि वह बैरूनी दरवाज़ों की मानिन्द है।

29पहरेदारों के कमरे, बरामदा और उस के सतून-नुमा बाज़ू सब पैमाइश के हिसाब से दीगर दरवाज़ों की मानिन्द थे। इस दरवाज़े और इस के साथ मुल्हिक़ बरामदे में भी खिड़कियाँ थीं। गुज़रगाह की पूरी लम्बाई साढ़े 87 फ़ुट थी। जब मेरे राहनुमा ने वह फ़ासिला नापा जो पहरेदारों के कमरे में से एक की पिछली दीवार से ले कर उस के मुक़ाबिल के कमरे की पिछली दीवार तक था तो मालूम हुआ कि पौने 44 फ़ुट है।

31लेकिन उस के बरामदे का रुख़ बैरूनी सहन की तरफ़ था। उस में पहुँचने के लिए एक सीढ़ी बनाई गई थी जिस के आठ क़दम्चे थे। दरवाज़े के सतून-नुमा बाज़ूओं पर खजूर के दरख़्त कन्दा किए गए थे।

अन्दरूनी सहन का मशरिक़ी दरवाज़ा

32इस के बाद मेरा राहनुमा मुझे मशरिक़ी दरवाज़े से हो कर अन्दरूनी सहन में लाया। जब उस ने यह दरवाज़ा नापा तो मालूम हुआ कि यह भी दीगर दरवाज़ों जितना बड़ा है।

33पहरेदारों के कमरे, दरवाज़े के सतून-नुमा बाज़ू और बरामदा पैमाइश के हिसाब से दीगर दरवाज़ों की मानिन्द थे। यहाँ भी दरवाज़े और बरामदे में खिड़कियाँ लगी थीं। गुज़रगाह की लम्बाई साढ़े 87 फ़ुट और चौड़ाई पौने 44 फ़ुट थी।

34इस दरवाज़े के बरामदे का रुख़ भी बैरूनी सहन की तरफ़ था। दरवाज़े के सतून-नुमा बाज़ूओं पर खजूर के दरख़्त कन्दा किए गए थे। बरामदे में पहुँचने के लिए एक सीढ़ी बनाई गई थी जिस के आठ क़दम्चे थे।

अन्दरूनी सहन का शिमाली दरवाज़ा

35फिर मेरा राहनुमा मुझे शिमाली दरवाज़े के पास लाया। उस की पैमाइश करने पर मालूम हुआ कि यह भी दीगर दरवाज़ों जितना बड़ा है।

36पहरेदारों के कमरे, सतून-नुमा बाज़ू, बरामदा और दीवारों में खिड़कियाँ भी दूसरे दरवाज़ों की मानिन्द थीं। गुज़रगाह की लम्बाई साढ़े 87 फ़ुट और चौड़ाई पौने 44 फ़ुट थी।

37उस के बरामदे का रुख़ भी बैरूनी सहन की तरफ़ था। दरवाज़े के सतून-नुमा बाज़ूओं पर खजूर के दरख़्त कन्दा किए गए थे। उस में पहुँचने के लिए एक सीढ़ी बनाई गई थी जिस के आठ क़दम्चे थे।

अन्दरूनी शिमाली दरवाज़े के पास ज़बह का बन्द-ओ-बस्त

38अन्दरूनी शिमाली दरवाज़े के बरामदे में दरवाज़ा था जिस में से गुज़र कर इन्सान उस कमरे में दाख़िल होता था जहाँ उन ज़बह किए हुए जानवरों को धोया जाता था जिन्हें भस्म करना होता था।

39बरामदे में चार मेज़ें थीं, कमरे के दोनों तरफ़ दो दो मेज़ें। इन मेज़ों पर उन जानवरों को ज़बह किया जाता था जो भस्म होने वाली क़ुर्बानियों, गुनाह की क़ुर्बानियों और क़ुसूर की क़ुर्बानियों के लिए मख़्सूस थे।

40इस बरामदे से बाहर मज़ीद चार ऐसी मेज़ें थीं, दो एक तरफ़ और दो दूसरी तरफ़।

41मिल मिला कर आठ मेज़ें थीं जिन पर क़ुर्बानियों के जानवर ज़बह किए जाते थे। चार बरामदे के अन्दर और चार उस से बाहर के सहन में थीं।

42बरामदे की चार मेज़ें तराशे हुए पत्थर से बनाई गई थीं। हर एक की लम्बाई और चौड़ाई साढ़े 31 इंच और ऊँचाई 21 इंच थी। उन पर वह तमाम आलात पड़े थे जो जानवरों को भस्म होने वाली क़ुर्बानी और बाक़ी क़ुर्बानियों के लिए तय्यार करने के लिए दरकार थे।

43जानवरों का गोश्त इन मेज़ों पर रखा जाता था। इर्दगिर्द की दीवारों में तीन तीन इंच लम्बी हुकें लगी थीं।

44फिर हम अन्दरूनी सहन में दाख़िल हुए। वहाँ शिमाली दरवाज़े के साथ एक कमरा मुल्हिक़ था जो अन्दरूनी सहन की तरफ़ खुला था और जिस का रुख़ जुनूब की तरफ़ था। जुनूबी दरवाज़े के साथ भी ऐसा कमरा था। उस का रुख़ शिमाल की तरफ़ था।

45मेरे राहनुमा ने मुझ से कहा, “जिस कमरे का रुख़ जुनूब की तरफ़ है वह उन इमामों के लिए है जो रब के घर की देख-भाल करते हैं,

46जबकि जिस कमरे का रुख़ शिमाल की तरफ़ है वह उन इमामों के लिए है जो क़ुर्बानगाह की देख-भाल करते हैं। तमाम इमाम सदोक़ की औलाद हैं। लावी के क़बीले में से सिर्फ़ उन ही को रब के हुज़ूर आ कर उस की ख़िदमत करने की इजाज़त है।”

अन्दरूनी सहन और रब का घर

47मेरे राहनुमा ने अन्दरूनी सहन की पैमाइश की। उस की लम्बाई और चौड़ाई पौने दो दो सौ फ़ुट थी। क़ुर्बानगाह इस सहन में रब के घर के सामने ही थी।

48फिर उस ने मुझे रब के घर के बरामदे में ले जा कर दरवाज़े के सतून-नुमा बाज़ूओं की पैमाइश की। मालूम हुआ कि यह पौने 9 फ़ुट मोटे हैं। दरवाज़े की चौड़ाई साढ़े 24 फ़ुट थी जबकि दाएँ बाएँ की दीवारों की लम्बाई सवा पाँच पाँच फ़ुट थी।

49चुनाँचे बरामदे की पूरी चौड़ाई 35 और लम्बाई 21 फ़ुट थी। उस में दाख़िल होने के लिए दस क़दम्चों वाली सीढ़ी बनाई गई थी। दरवाज़े के दोनों सतून-नुमा बाज़ूओं के साथ साथ एक एक सतून खड़ा किया गया था।