हिज़्क़ीएल 47:1-23 DGV - Bible AI

रब के घर में से निकलने वाला दरया

1इस के बाद मेरा राहनुमा मुझे एक बार फिर रब के घर के दरवाज़े के पास ले गया। यह दरवाज़ा मशरिक़ में था, क्यूँकि रब के घर का रुख़ ही मशरिक़ की तरफ़ था। मैं ने देखा कि दहलीज़ के नीचे से पानी निकल रहा है। दरवाज़े से निकल कर वह पहले रब के घर की जुनूबी दीवार के साथ साथ बहता था, फिर क़ुर्बानगाह के जुनूब में से गुज़र कर मशरिक़ की तरफ़ बह निकला।

2मेरा राहनुमा मेरे साथ बैरूनी सहन के शिमाली दरवाज़े में से निकला। बाहर चारदीवारी के साथ साथ चलते चलते हम बैरूनी सहन के मशरिक़ी दरवाज़े के पास पहुँच गए। मैं ने देखा कि पानी इस दरवाज़े के जुनूबी हिस्से में से निकल रहा है।

3हम पानी के किनारे किनारे चल पड़े। मेरे राहनुमा ने अपने फ़ीते के साथ आधा किलोमीटर का फ़ासिला नापा। फिर उस ने मुझे पानी में से गुज़रने को कहा। यहाँ पानी टख़नों तक पहुँचता था।

4उस ने मज़ीद आधे किलोमीटर का फ़ासिला नापा, फिर मुझे दुबारा पानी में से गुज़रने को कहा। अब पानी घुटनों तक पहुँचा। जब उस ने तीसरी मर्तबा आधा किलोमीटर का फ़ासिला नाप कर मुझे उस में से गुज़रने दिया तो पानी कमर तक पहुँचा।

5एक आख़िरी दफ़ा उस ने आधे किलोमीटर का फ़ासिला नापा। अब मैं पानी में से गुज़र न सका। पानी इतना गहरा था कि उस में से गुज़रने के लिए तैरने की ज़रूरत थी।

6उस ने मुझ से पूछा, “ऐ आदमज़ाद, क्या तू ने ग़ौर किया है?” फिर वह मुझे दरया के किनारे तक वापस लाया।

7जब वापस आया तो मैं ने देखा कि दरया के दोनों किनारों पर मुतअद्दिद दरख़्त लगे हैं।

8वह बोला, “यह पानी मशरिक़ की तरफ़ बह कर वादी-ए-यर्दन में पहुँचता है। उसे पार करके वह बहीरा-ए-मुर्दार में आ जाता है। उस के असर से बहीरा-ए-मुर्दार का नमकीन पानी पीने के क़ाबिल हो जाएगा।

9जहाँ भी दरया बहेगा वहाँ के बेशुमार जानदार जीते रहेंगे। बहुत मछलियाँ होंगी, और दरया बहीरा-ए-मुर्दार का नमकीन पानी पीने के क़ाबिल बनाएगा। जहाँ से भी गुज़रेगा वहाँ सब कुछ फलता फूलता रहेगा।

10ऐन-जदी से ले कर ऐन-अज्लैम तक उस के किनारों पर मछेरे खड़े होंगे। हर तरफ़ उन के जाल सूखने के लिए फैलाए हुए नज़र आएँगे। दरया में हर क़िस्म की मछलियाँ होंगी, उतनी जितनी बहीरा-ए-रूम में पाई जाती हैं।

11सिर्फ़ बहीरा-ए-मुर्दार के इर्दगिर्द की दलदली जगहों और जोहड़ों का पानी नमकीन रहेगा, क्यूँकि वह नमक हासिल करने के लिए इस्तेमाल होगा।

12दरया के दोनों किनारों पर हर क़िस्म के फलदार दरख़्त उगेंगे। इन दरख़्तों के पत्ते न कभी मुरझाएँगे, न कभी उन का फल ख़त्म होगा। वह हर महीने फल लाएँगे, इस लिए कि मक़्दिस का पानी उन की आबपाशी करता रहेगा। उन का फल लोगों की ख़ुराक बनेगा, और उन के पत्ते शिफ़ा देंगे।”

इस्राईल की सरहद्दें

13फिर रब क़ादिर-ए-मुतलक़ ने फ़रमाया, “मैं तुझे उस मुल्क की सरहद्दें बताता हूँ जो बारह क़बीलों में तक़्सीम करना है। यूसुफ़ को दो हिस्से देने हैं, बाक़ी क़बीलों को एक एक हिस्सा।

14मैं ने अपना हाथ उठा कर क़सम खाई थी कि मैं यह मुल्क तुम्हारे बापदादा को अता करूँगा, इस लिए तुम यह मुल्क मीरास में पाओगे। अब उसे आपस में बराबर तक़्सीम कर लो।

15शिमाली सरहद बहीरा-ए-रूम से शुरू हो कर मशरिक़ की तरफ़ हत्लून, लबो-हमात और सिदाद के पास से गुज़रती है।

16वहाँ से वह बेरोता और सिब्रैम के पास पहुँचती है (सिब्रैम मुल्क-ए-दमिश्क़ और मुल्क-ए-हमात के दरमियान वाक़े है)। फिर सरहद हसर-एनान शहर तक आगे निकलती है जो हौरान की सरहद पर वाक़े है।

17ग़रज़ शिमाली सरहद बहीरा-ए-रूम से ले कर हसर-एनान तक पहुँचती है। दमिश्क़ और हमात की सरहद्दें उस के शिमाल में हैं।

18मुल्क की मशरिक़ी सरहद वहाँ शुरू होती है जहाँ दमिश्क़ का इलाक़ा हौरान के पहाड़ी इलाक़े से मिलता है। वहाँ से सरहद दरया-ए-यर्दन के साथ साथ चलती हुई जुनूब में बहीरा-ए-रूम के पास तमर शहर तक पहुँचती है। यूँ दरया-ए-यर्दन मुल्क-ए-इस्राईल की मशरिक़ी सरहद और मुल्क-ए-जिलिआद की मग़रिबी सरहद है।

19जुनूबी सरहद तमर से शुरू हो कर जुनूब-मग़रिब की तरफ़ चलती चलती मरीबा-क़ादिस के चश्मों तक पहुँचती है। फिर वह शिमाल-मग़रिब की तरफ़ रुख़ करके मिस्र की सरहद यानी वादी-ए-मिस्र के साथ साथ बहीरा-ए-रूम तक पहुँचती है।

20मग़रिबी सरहद बहीरा-ए-रूम है जो शिमाल में लबो-हमात के मुक़ाबिल ख़त्म होती है।

21मुल्क को अपने क़बीलों में तक़्सीम करो!

22यह तुम्हारी मौरूसी ज़मीन होगी। जब तुम क़ुरआ डाल कर उसे आपस में तक़्सीम करो तो उन ग़ैरमुल्कियों को भी ज़मीन मिलनी है जो तुम्हारे दरमियान रहते और जिन के बच्चे यहाँ पैदा हुए हैं। तुम्हारा उन के साथ वैसा सुलूक हो जैसा इस्राईलियों के साथ। क़ुरआ डालते वक़्त उन्हें इस्राईली क़बीलों के साथ ज़मीन मिलनी है।

23रब क़ादिर-ए-मुतलक़ फ़रमाता है कि जिस क़बीले में भी परदेसी आबाद हों वहाँ तुम्हें उन्हें मौरूसी ज़मीन देनी है।