रब के घर की तामीर के लिए नज़राने
1फिर दाऊद दुबारा पूरी जमाअत से मुख़ातिब हुआ, “अल्लाह ने मेरे बेटे सुलैमान को चुन कर मुक़र्रर किया है कि वह अगला बादशाह बने। लेकिन वह अभी जवान और नातजरिबाकार है, और यह तामीरी काम बहुत वसी है। उसे तो यह महल इन्सान के लिए नहीं बनाना है बल्कि रब हमारे ख़ुदा के लिए।
2मैं पूरी जाँफ़िशानी से अपने ख़ुदा के घर की तामीर के लिए सामान जमा कर चुका हूँ। इस में सोना-चाँदी, पीतल, लोहा, लकड़ी, अक़ीक़-ए-अह्मर,
3और चूँकि मुझ में अपने ख़ुदा का घर बनाने के लिए बोझ है इस लिए मैं ने इन चीज़ों के इलावा अपने ज़ाती ख़ज़ानों से भी सोना और चाँदी दी है
4यानी तक़रीबन 1,00,000 किलोग्राम ख़ालिस सोना और 2,35,000 किलोग्राम ख़ालिस चाँदी। मैं चाहता हूँ कि यह कमरों की दीवारों पर चढ़ाई जाए।
5कुछ कारीगरों के बाक़ी कामों के लिए भी इस्तेमाल हो सकता है। अब मैं आप से पूछता हूँ, आज कौन मेरी तरह ख़ुशी से रब के काम के लिए कुछ देने को तय्यार है?”
6यह सुन कर वहाँ हाज़िर ख़ानदानी सरपरस्तों, क़बीलों के बुज़ुर्गों, हज़ार हज़ार और सौ सौ फ़ौजियों पर मुक़र्रर अफ़्सरों और बादशाह के आला सरकारी अफ़्सरों ने ख़ुशी से काम के लिए हदिए दिए।
7उस दिन रब के घर के लिए तक़रीबन 1,70,000 किलोग्राम सोना, सोने के 10,000 सिक्के, 3,40,000 किलोग्राम चाँदी, 6,10,000 किलोग्राम पीतल और 34,00,000 किलोग्राम लोहा जमा हुआ।
8जिस के पास जवाहिर थे उस ने उन्हें यहीएल जैर्सोनी के हवाले कर दिया जो ख़ज़ान्ची था और जिस ने उन्हें रब के घर के ख़ज़ाने में मह्फ़ूज़ कर लिया।
9पूरी क़ौम इस फ़राख़दिली को देख कर ख़ुश हुई, क्यूँकि सब ने दिली ख़ुशी और फ़य्याज़ी से अपने हदिए रब को पेश किए। दाऊद बादशाह भी निहायत ख़ुश हुआ।
दाऊद की दुआ
10इस के बाद दाऊद ने पूरी जमाअत के सामने रब की तम्जीद करके कहा,
11ऐ रब, अज़मत, क़ुदरत, जलाल और शान-ओ-शौकत तेरे ही हैं, क्यूँकि जो कुछ भी आसमान और ज़मीन में है वह तेरा ही है। ऐ रब, सल्तनत तेरे हाथ में है, और तू तमाम चीज़ों पर सरफ़राज़ है।
12दौलत और इज़्ज़त तुझ से मिलती है, और तू सब पर हुक्मरान है। तेरे हाथ में ताक़त और क़ुदरत है, और हर इन्सान को तू ही ताक़तवर और मज़बूत बना सकता है।
13ऐ हमारे ख़ुदा, यह देख कर हम तेरी सताइश और तेरे जलाली नाम की तारीफ़ करते हैं।
14मेरी और मेरी क़ौम की क्या हैसियत है कि हम इतनी फ़य्याज़ी से यह चीज़ें दे सके? आख़िर हमारी तमाम मिलकियत तेरी तरफ़ से है। जो कुछ भी हम ने तुझे दे दिया वह हमें तेरे हाथ से मिला है।
15अपने बापदादा की तरह हम भी तेरे नज़्दीक परदेसी और ग़ैरशहरी हैं। दुनिया में हमारी ज़िन्दगी साय की तरह आरिज़ी है, और मौत से बचने की कोई उम्मीद नहीं।
16ऐ रब हमारे ख़ुदा, हम ने यह सारा तामीरी सामान इस लिए इकट्ठा किया है कि तेरे मुक़द्दस नाम के लिए घर बनाया जाए। लेकिन हक़ीक़त में यह सब कुछ पहले से तेरे हाथ से हासिल हुआ है। यह पहले से तेरा ही है।
17ऐ मेरे ख़ुदा, मैं जानता हूँ कि तू इन्सान का दिल जाँच लेता है, कि दियानतदारी तुझे पसन्द है। जो कुछ भी मैं ने दिया है वह मैं ने ख़ुशी से और अच्छी नीयत से दिया है। अब मुझे यह देख कर ख़ुशी है कि यहाँ हाज़िर तेरी क़ौम ने भी इतनी फ़य्याज़ी से तुझे हदिए दिए हैं।
18ऐ रब हमारे बापदादा इब्राहीम, इस्हाक़ और इस्राईल के ख़ुदा, गुज़ारिश है कि तू हमेशा तक अपनी क़ौम के दिलों में ऐसी ही तड़प क़ाइम रख। अता कर कि उन के दिल तेरे साथ लिपटे रहें।
19मेरे बेटे सुलैमान की भी मदद कर ताकि वह पूरे दिल-ओ-जान से तेरे अह्काम और हिदायात पर अमल करे और उस महल को तक्मील तक पहुँचा सके जिस के लिए मैं ने तय्यारियाँ की हैं।”
20फिर दाऊद ने पूरी जमाअत से कहा, “आएँ, रब अपने ख़ुदा की सताइश करें!” चुनाँचे सब रब अपने बापदादा के ख़ुदा की तम्जीद करके रब और बादशाह के सामने मुँह के बल झुक गए।
21अगले दिन तमाम इस्राईल के लिए भस्म होने वाली बहुत सी क़ुर्बानियाँ उन की मै की नज़रों समेत रब को पेश की गईं। इस के लिए 1,000 जवान बैलों, 1,000 मेंढों और 1,000 भेड़ के बच्चों को चढ़ाया गया। साथ साथ ज़बह की बेशुमार क़ुर्बानियाँ भी पेश की गईं।
22उस दिन उन्हों ने रब के हुज़ूर खाते-पीते हुए बड़ी ख़ुशी मनाई। फिर उन्हों ने दुबारा इस की तस्दीक़ की कि दाऊद का बेटा सुलैमान हमारा बादशाह है। तेल से उसे मसह करके उन्हों ने उसे रब के हुज़ूर बादशाह और सदोक़ को इमाम क़रार दिया।
सुलैमान की ज़बरदस्त हुकूमत
23यूँ सुलैमान अपने बाप दाऊद की जगह रब के तख़्त पर बैठ गया। उसे कामयाबी हासिल हुई, और तमाम इस्राईल उस के ताबे रहा।
24तमाम आला अफ़्सर, बड़े बड़े फ़ौजी और दाऊद के बाक़ी बेटों ने भी अपनी ताबेदारी का इज़हार किया।
25इस्राईल के देखते देखते रब ने सुलैमान को बहुत सरफ़राज़ किया। उस ने उस की सल्तनत को ऐसी शान-ओ-शौकत से नवाज़ा जो माज़ी में इस्राईल के किसी भी बादशाह को हासिल नहीं हुई थी।
दाऊद की वफ़ात
26दाऊद बिन यस्सी कुल 40 साल तक इस्राईल का बादशाह रहा, 7 साल हब्रून में और 33 साल यरूशलम में।
28वह बहुत उम्ररसीदा और उम्र, दौलत और इज़्ज़त से आसूदा हो कर इन्तिक़ाल कर गया। फिर सुलैमान तख़्तनशीन हुआ।
29बाक़ी जो कुछ दाऊद की हुकूमत के दौरान हुआ वह तीनों किताबों ‘समूएल ग़ैबबीन की तारीख़,’ ‘नातन नबी की तारीख़’ और ‘जाद ग़ैबबीन की तारीख़’ में दर्ज है।
30इन में उस की हुकूमत और असर-ओ-रसूख़ की तफ़्सीलात बयान की गई हैं, नीज़ वह कुछ जो उस के साथ, इस्राईल के साथ और गिर्द-ओ-नवाह के ममालिक के साथ हुआ।