१-समूएल 27:1-12 DGV - Bible AI

दाऊद दुबारा अकीस के पास

1इस तजरिबे के बाद दाऊद सोचने लगा, “अगर मैं यहीं ठहर जाऊँ तो किसी दिन साऊल मुझे मार डालेगा। बेहतर है कि अपनी हिफ़ाज़त के लिए फ़िलिस्तियों के मुल्क में चला जाऊँ। तब साऊल पूरे इस्राईल में मेरा खोज लगाने से बाज़ आएगा, और मैं मह्फ़ूज़ रहूँगा।”

2चुनाँचे वह अपने 600 आदमियों को ले कर जात के बादशाह अकीस बिन माओक के पास चला गया।

3उन के ख़ानदान साथ थे। दाऊद की दो बीवियाँ अख़ीनूअम यज़्रएली और नाबाल की बेवा अबीजेल कर्मिली भी साथ थीं। अकीस ने उन्हें जात शहर में रहने की इजाज़त दी।

4जब साऊल को ख़बर मिली कि दाऊद ने जात में पनाह ली है तो वह उस का खोज लगाने से बाज़ आया।

5एक दिन दाऊद ने अकीस से बात की, “अगर आप की नज़र-ए-करम मुझ पर है तो मुझे देहात की किसी आबादी में रहने की इजाज़त दें। क्या ज़रूरत है कि मैं यहाँ आप के साथ दार-उल-हुकूमत में रहूँ?”

6अकीस मुत्तफ़िक़ हुआ। उस दिन उस ने उसे सिक़्लाज शहर दे दिया। यह शहर उस वक़्त से यहूदाह के बादशाहों की मिलकियत में रहा है।

7दाऊद एक साल और चार महीने फ़िलिस्ती मुल्क में ठहरा रहा।

8सिक़्लाज से दाऊद अपने आदमियों के साथ मुख़्तलिफ़ जगहों पर हम्ला करने के लिए निकलता रहा। कभी वह जसूरियों पर धावा बोलते, कभी जिर्ज़ियों या अमालीक़ियों पर। यह क़बीले क़दीम ज़माने से यहूदाह के जुनूब में शूर और मिस्र की सरहद तक रहते थे।

9जब भी कोई मक़ाम दाऊद के क़ब्ज़े में आ जाता तो वह किसी भी मर्द या औरत को ज़िन्दा न रहने देता लेकिन भेड़-बकरियों, गाय-बैलों, गधों, ऊँटों और कपड़ों को अपने साथ सिक़्लाज ले जाता।

9जब भी दाऊद किसी हमले से वापस आ कर बादशाह अकीस से मिलता

10तो वह पूछता, “आज आप ने किस पर छापा मारा?” फिर दाऊद जवाब देता, “यहूदाह के जुनूबी इलाक़े पर,” या “यरहमिएलियों के जुनूबी इलाक़े पर,” या “क़ीनियों के जुनूबी इलाक़े पर।”

11जब भी दाऊद किसी आबादी पर हम्ला करता तो वह तमाम बाशिन्दों को मौत के घाट उतार देता और न मर्द, न औरत को ज़िन्दा छोड़ कर जात लाता। क्यूँकि उस ने सोचा, “ऐसा न हो कि फ़िलिस्तियों को पता चले कि मैं असल में इस्राईली आबादियों पर हम्ला नहीं कर रहा।”

11जितना वक़्त दाऊद ने फ़िलिस्ती मुल्क में गुज़ारा वह ऐसा ही करता रहा।

12अकीस ने दाऊद पर पूरा भरोसा किया, क्यूँकि उस ने सोचा, “अब दाऊद को हमेशा तक मेरी ख़िदमत में रहना पड़ेगा, क्यूँकि ऐसी हरकतों से उस की अपनी क़ौम उस से सख़्त मुतनफ़्फ़िर हो गई है।”