रब सुलैमान से हमकलाम होता है
1चुनाँचे सुलैमान ने रब के घर और शाही महल को तक्मील तक पहुँचाया। जो कुछ भी उस ने ठान लिया था वह पूरा हुआ।
2उस वक़्त रब दुबारा उस पर ज़ाहिर हुआ, उस तरह जिस तरह वह जिबऊन में उस पर ज़ाहिर हुआ था।
3उस ने सुलैमान से कहा,
4जहाँ तक तेरा ताल्लुक़ है, अपने बाप दाऊद की तरह दियानतदारी और रास्ती से मेरे हुज़ूर चलता रह। क्यूँकि अगर तू मेरे तमाम अह्काम और हिदायात की पैरवी करता रहे
5तो मैं तेरी इस्राईल पर हुकूमत हमेशा तक क़ाइम रखूँगा। फिर मेरा वह वादा क़ाइम रहेगा जो मैं ने तेरे बाप दाऊद से किया था कि इस्राईल पर तेरी औलाद की हुकूमत हमेशा तक क़ाइम रहेगी।
6लेकिन ख़बरदार! अगर तू या तेरी औलाद मुझ से दूर हो कर मेरे दिए गए अह्काम और हिदायात के ताबे न रहे बल्कि दीगर माबूदों की तरफ़ रुजू करके उन की ख़िदमत और परस्तिश करे
7तो मैं इस्राईल को उस मुल्क में से मिटा दूँगा जो मैं ने उन को दे दिया था। न सिर्फ़ यह बल्कि मैं इस घर को भी रद्द कर दूँगा जो मैं ने अपने नाम के लिए मख़्सूस-ओ-मुक़द्दस कर लिया है। उस वक़्त इस्राईल तमाम अक़्वाम में मज़ाक़ और लान-तान का निशाना बन जाएगा।
8इस शानदार घर की बुरी हालत देख कर यहाँ से गुज़रने वाले तमाम लोगों के रोंगटे खड़े हो जाएंगे, और वह अपनी हिक़ारत का इज़हार करके पूछेंगे, ‘रब ने इस मुल्क और इस घर से ऐसा सुलूक क्यूँ किया?’
9तब लोग जवाब देंगे, ‘इस लिए कि गो रब उन का ख़ुदा उन के बापदादा को मिस्र से निकाल कर यहाँ लाया तो भी यह लोग उसे तर्क करके दीगर माबूदों से चिमट गए हैं। चूँकि वह उन की परस्तिश और ख़िदमत करने से बाज़ न आए इस लिए रब ने उन्हें इस सारी मुसीबत में डाल दिया है’।”
हीराम की मदद का सिला
10रब के घर और शाही महल को तामीर करने में 20 साल सर्फ़ हुए थे।
11उस दौरान सूर का बादशाह हीराम सुलैमान को देवदार और जूनीपर की उतनी लकड़ी और उतना सोना भेजता रहा जितना सुलैमान चाहता था। जब इमारतें तक्मील तक पहुँच गईं तो सुलैमान ने हीराम को मुआवज़े में गलील के 20 शहर दे दिए।
12लेकिन जब हीराम उन का मुआइना करने के लिए सूर से गलील आया तो वह उसे पसन्द न आए।
13उस ने सवाल किया, “मेरे भाई, यह कैसे शहर हैं जो आप ने मुझे दिए हैं?” और उस ने उस इलाक़े का नाम काबूल यानी ‘कुछ भी नहीं’ रखा। यह नाम आज तक राइज है।
14बात यह थी कि हीराम ने इस्राईल के बादशाह को तक़रीबन 4,000 किलोग्राम सोना भेजा था।
सुलैमान की मुख़्तलिफ़ मुहिम्मात
15सुलैमान ने अपने तामीरी काम के लिए बेगारी लगाए। ऐसे ही लोगों की मदद से उस ने न सिर्फ़ रब का घर, अपना महल, इर्दगिर्द के चबूतरे और यरूशलम की फ़सील बनवाई बल्कि तीनों शहर हसूर, मजिद्दो और जज़र को भी।
16जज़र शहर पर मिस्र के बादशाह फ़िरऔन ने हम्ला करके क़ब्ज़ा कर लिया था। उस के कनआनी बाशिन्दों को क़त्ल करके उस ने पूरे शहर को जला दिया था। जब सुलैमान की फ़िरऔन की बेटी से शादी हुई तो मिस्री बादशाह ने जहेज़ के तौर पर उसे यह इलाक़ा दे दिया।
17अब सुलैमान ने जज़र का शहर दुबारा तामीर किया। इस के इलावा उस ने नशेबी बैत-हौरून,
18बालात और रेगिस्तान के शहर तदमूर में बहुत सा तामीरी काम कराया।
19सुलैमान ने अपने गोदामों के लिए और अपने रथों और घोड़ों को रखने के लिए भी शहर बनवाए। जो कुछ भी वह यरूशलम, लुबनान या अपनी सल्तनत की किसी और जगह बनवाना चाहता था वह उस ने बनवाया।
20जिन आदमियों की सुलैमान ने बेगार पर भर्ती की वह इस्राईली नहीं थे बल्कि अमोरी, हित्ती, फ़रिज़्ज़ी, हिव्वी और यबूसी यानी कनआन के पहले बाशिन्दों की वह औलाद थे जो बाक़ी रह गए थे। मुल्क पर क़ब्ज़ा करते वक़्त इस्राईली इन क़ौमों को पूरे तौर पर मिटा न सके, और आज तक इन की औलाद को इस्राईल के लिए बेगार में काम करना पड़ता है।
22लेकिन सुलैमान ने इस्राईलियों में से किसी को भी ऐसे काम करने पर मज्बूर न किया बल्कि वह उस के फ़ौजी, सरकारी अफ़्सर, फ़ौज के अफ़्सर और रथों के फ़ौजी बन गए, और उन्हें उस के रथों और घोड़ों पर मुक़र्रर किया गया।
23सुलैमान के तामीरी काम पर भी 550 इस्राईली मुक़र्रर थे जो ज़िलओं पर मुक़र्रर अफ़्सरों के ताबे थे। यह लोग तामीरी काम करने वालों की निगरानी करते थे।
24जब फ़िरऔन की बेटी यरूशलम के पुराने हिस्से बनाम ‘दाऊद का शहर’ से उस महल में मुन्तक़िल हुई जो सुलैमान ने उस के लिए तामीर किया था तो वह इर्दगिर्द के चबूतरे बनवाने लगा।
25सुलैमान साल में तीन बार रब को भस्म होने वाली और सलामती की क़ुर्बानियाँ पेश करता था। वह उन्हें रब के घर की उस क़ुर्बानगाह पर चढ़ाता था जो उस ने रब के लिए बनवाई थी। साथ साथ वह बख़ूर भी जलाता था। यूँ उस ने रब के घर को तक्मील तक पहुँचाया।
26इस के इलावा सुलैमान बादशाह ने बहरी जहाज़ों का बेड़ा भी बनवाया। इस काम का मर्कज़ ऐलात के क़रीब शहर अस्यून-जाबर था। यह बन्दरगाह मुल्क-ए-अदोम में बहर-ए-क़ुल्ज़ुम के साहिल पर है।
27हीराम बादशाह ने उसे तजरिबाकार मल्लाह भेजे ताकि वह सुलैमान के आदमियों के साथ मिल कर जहाज़ों को चलाएँ।
28उन्हों ने ओफ़ीर तक सफ़र किया और वहाँ से तक़रीबन 14,000 किलोग्राम सोना सुलैमान के पास ले आए।