रहुबिआम को इस्राईल से लड़ने की इजाज़त नहीं मिलती
1जब रहुबिआम यरूशलम पहुँचा तो उस ने यहूदाह और बिनयमीन के क़बीलों के चीदा चीदा फ़ौजियों को इस्राईल से जंग करने के लिए बुलाया। 1,80,000 मर्द जमा हुए ताकि रहुबिआम के लिए इस्राईल पर दुबारा क़ाबू पाएँ।
2लेकिन ऐन उस वक़्त मर्द-ए-ख़ुदा समायाह को रब की तरफ़ से पैग़ाम मिला,
3“यहूदाह के बादशाह रहुबिआम बिन सुलैमान और यहूदाह और बिनयमीन के तमाम अफ़राद को इत्तिला दे,
4‘रब फ़रमाता है कि अपने भाइयों से जंग मत करना। हर एक अपने अपने घर वापस चला जाए, क्यूँकि जो कुछ हुआ है वह मेरे हुक्म पर हुआ है’।”
रहुबिआम की क़िलाबन्दी
5रहुबिआम का दार-उल-हुकूमत यरूशलम रहा। यहूदाह में उस ने ज़ैल के शहरों की क़िलाबन्दी की :
6बैत-लहम, ऐताम, तक़ूअ,
7बैत-सूर, सोका, अदुल्लाम,
8जात, मरेसा, ज़ीफ़,
9अदूराईम, लकीस, अज़ीक़ा,
10सुरआ, अय्यालोन और हब्रून। यहूदाह और बिनयमीन के इन क़िलाबन्द शहरों को
11मज़बूत करके रहुबिआम ने हर शहर पर अफ़्सर मुक़र्रर किए। उन में उस ने ख़ुराक, ज़ैतून के तेल और मै का ज़ख़ीरा कर लिया
12और साथ साथ उन में ढालें और नेज़े भी रखे। इस तरह उस ने उन्हें बहुत मज़बूत बना कर यहूदाह और बिनयमीन पर अपनी हुकूमत मह्फ़ूज़ कर ली।
इमाम और लावी यहूदाह में मुन्तक़िल हो जाते हैं
13गो इमाम और लावी तमाम इस्राईल में बिखरे रहते थे तो भी उन्हों ने रहुबिआम का साथ दिया।
14अपनी चरागाहों और मिलकियत को छोड़ कर वह यहूदाह और यरूशलम में आबाद हुए, क्यूँकि यरुबिआम और उस के बेटों ने उन्हें इमाम की हैसियत से रब की ख़िदमत करने से रोक दिया था।
15उन की जगह उस ने अपने ज़ाती इमाम मुक़र्रर किए जो ऊँची जगहों पर के मन्दिरों को सँभालते हुए बकरे के देवताओं और बछड़े के बुतों की ख़िदमत करते थे।
16लावियों की तरह तमाम क़बीलों के बहुत से ऐसे लोग यहूदाह में मुन्तक़िल हुए जो पूरे दिल से रब इस्राईल के ख़ुदा के तालिब रहे थे। वह यरूशलम आए ताकि रब अपने बापदादा के ख़ुदा को क़ुर्बानियाँ पेश कर सकें।
17यहूदाह की सल्तनत ने ऐसे लोगों से तक़वियत पाई। वह रहुबिआम बिन सुलैमान के लिए तीन साल तक मज़बूती का सबब थे, क्यूँकि तीन साल तक यहूदाह दाऊद और सुलैमान के अच्छे नमूने पर चलता रहा।
रहुबिआम का ख़ानदान
18रहुबिआम की शादी महलत से हुई जो यरीमोत और अबीख़ैल की बेटी थी। यरीमोत दाऊद का बेटा और अबीख़ैल इलियाब बिन यस्सी की बेटी थी।
19महलत के तीन बेटे यऊस, समरियाह और ज़हम पैदा हुए।
20बाद में रहुबिआम की माका बिन्त अबीसलूम से शादी हुई। इस रिश्ते से चार बेटे अबियाह, अत्ती, ज़ीज़ा और सलूमीत पैदा हुए।
21रहुबिआम की 18 बीवियाँ और 60 दाश्ताएँ थीं। इन के कुल 28 बेटे और 60 बेटियाँ पैदा हुईं। लेकिन माका बिन्त अबीसलूम रहुबिआम को सब से ज़्यादा प्यारी थी।
22उस ने माका के पहलौठे अबियाह को उस के भाइयों का सरबराह बना दिया और मुक़र्रर किया कि यह बेटा मेरे बाद बादशाह बनेगा।
23रहुबिआम ने अपने बेटों से बड़ी समझदारी के साथ सुलूक किया, क्यूँकि उस ने उन्हें अलग अलग करके यहूदाह और बिनयमीन के पूरे क़बाइली इलाक़े और तमाम क़िलाबन्द शहरों में बसा दिया। साथ साथ वह उन्हें कस्रत की ख़ुराक और बीवियाँ मुहय्या करता रहा।