इलीशा याहू को मसह करता है
1एक दिन इलीशा नबी ने नबियों के गुरोह में से एक को बुला कर कहा, “सफ़र के लिए कमरबस्ता हो कर रामात-जिलिआद के लिए रवाना हो जाएँ। ज़ैतून के तेल की यह कुप्पी अपने साथ ले जाएँ।
2वहाँ पहुँच कर याहू बिन यहूसफ़त बिन निम्सी को तलाश करें। जब उस से मुलाक़ात हो तो उसे उस के साथियों से अलग करके किसी अन्दरूनी कमरे में ले जाएँ।
3वहाँ कुप्पी ले कर याहू के सर पर तेल उंडेल दें और कहें, ‘रब फ़रमाता है कि मैं तुझे तेल से मसह करके इस्राईल का बादशाह बना देता हूँ।’ इस के बाद देर न करें बल्कि फ़ौरन दरवाज़े को खोल कर भाग जाएँ!”
4चुनाँचे जवान नबी रामात-जिलिआद के लिए रवाना हुआ।
5जब वहाँ पहुँचा तो फ़ौजी अफ़्सर मिल कर बैठे हुए थे। वह उन के क़रीब गया और बोला, “मेरे पास कमाँडर के लिए पैग़ाम है।” याहू ने सवाल किया, “हम में से किस के लिए?” नबी ने जवाब दिया, “आप ही के लिए।”
6याहू खड़ा हुआ और उस के साथ घर में गया। वहाँ नबी ने याहू के सर पर तेल उंडेल कर कहा, “रब इस्राईल का ख़ुदा फ़रमाता है, ‘मैं ने तुझे मसह करके अपनी क़ौम का बादशाह बना दिया है।
7तुझे अपने मालिक अख़ियब के पूरे ख़ानदान को हलाक करना है। यूँ मैं उन नबियों का इन्तिक़ाम लूँगा जो मेरी ख़िदमत करते हुए शहीद हो गए हैं। हाँ, मैं रब के उन तमाम ख़ादिमों का बदला लूँगा जिन्हें ईज़बिल ने क़त्ल किया है।
8अख़ियब का पूरा घराना तबाह हो जाएगा। मैं उस के ख़ानदान के हर मर्द को हलाक कर दूँगा, ख़्वाह वह बालिग़ हो या बच्चा।
9मेरा अख़ियब के ख़ानदान के साथ वही सुलूक होगा जो मैं ने यरुबिआम बिन नबात और बाशा बिन अख़ियाह के ख़ानदानों के साथ किया।
10जहाँ तक ईज़बिल का ताल्लुक़ है उसे दफ़नाया नहीं जाएगा बल्कि कुत्ते उसे यज़्रएल की ज़मीन पर खा जाएंगे’।” यह कह कर नबी दरवाज़ा खोल कर भाग गया।
11जब याहू निकल कर अपने साथी अफ़्सरों के पास वापस आया तो उन्हों ने पूछा, “क्या सब ख़ैरियत है? यह दीवाना आप से क्या चाहता था?” याहू बोला, “ख़ैर, आप तो इस क़िस्म के लोगों को जानते हैं कि किस तरह की गप्पें हाँकते हैं।”
12लेकिन उस के साथी इस जवाब से मुत्मइन न हुए, “झूट! सहीह बात बताएँ।” फिर याहू ने उन्हें खुल कर बात बताई, “आदमी ने कहा, ‘रब फ़रमाता है कि मैं ने तुझे मसह करके इस्राईल का बादशाह बना दिया है’।”
13यह सुन कर अफ़्सरों ने जल्दी जल्दी अपनी चादरों को उतार कर उस के सामने सीढ़ियों पर बिछा दिया। फिर वह नरसिंगा बजा बजा कर नारा लगाने लगे, “याहू बादशाह ज़िन्दाबाद!”
यूराम और अख़ज़ियाह का अन्जाम
14याहू बिन यहूसफ़त बिन निम्सी फ़ौरन यूराम बादशाह को तख़्त से उतारने के मन्सूबे बांधने लगा। यूराम उस वक़्त पूरी इस्राईली फ़ौज समेत रामात-जिलिआद के क़रीब दमिश्क़ के बादशाह हज़ाएल से लड़ रहा था। लेकिन शहर का दिफ़ा करते करते
15बादशाह शाम के फ़ौजियों के हाथों ज़ख़्मी हो गया था और मैदान-ए-जंग को छोड़ कर यज़्रएल वापस आया था ताकि ज़ख़्म भर जाएँ। अब याहू ने अपने साथी अफ़्सरों से कहा, “अगर आप वाक़ई मेरे साथ हैं तो किसी को भी शहर से निकलने न दें, वर्ना ख़तरा है कि कोई यज़्रएल जा कर बादशाह को इत्तिला दे दे।”
16फिर वह रथ पर सवार हो कर यज़्रएल चला गया जहाँ यूराम आराम कर रहा था। उस वक़्त यहूदाह का बादशाह अख़ज़ियाह भी यूराम से मिलने के लिए यज़्रएल आया हुआ था।
17जब यज़्रएल के बुर्ज पर खड़े पहरेदार ने याहू के ग़ोल को शहर की तरफ़ आते हुए देखा तो उस ने बादशाह को इत्तिला दी। यूराम ने हुक्म दिया, “एक घुड़सवार को उन की तरफ़ भेज कर उन से मालूम करें कि सब ख़ैरियत है या नहीं।”
18घुड़सवार शहर से निकला और याहू के पास आ कर कहा, “बादशाह पूछते हैं कि क्या सब ख़ैरियत है?” याहू ने जवाब दिया, “इस से आप का क्या वास्ता? आएँ, मेरे पीछे हो लें।” बुर्ज पर के पहरेदार ने बादशाह को इत्तिला दी, “क़ासिद उन तक पहुँच गया है, लेकिन वह वापस नहीं आ रहा।”
19तब बादशाह ने एक और घुड़सवार को भेज दिया। याहू के पास पहुँच कर उस ने भी कहा, “बादशाह पूछते हैं कि क्या सब ख़ैरियत है?” याहू ने जवाब दिया, “इस से आप का क्या वास्ता? मेरे पीछे हो लें।”
20बुर्ज पर के पहरेदार ने यह देख कर बादशाह को इत्तिला दी, “हमारा क़ासिद उन तक पहुँच गया है, लेकिन यह भी वापस नहीं आ रहा। ऐसा लगता है कि उन का राहनुमा याहू बिन निम्सी है, क्यूँकि वह अपने रथ को दीवाने की तरह चला रहा है।”
21यूराम ने हुक्म दिया, “मेरे रथ को तय्यार करो!” फिर वह और यहूदाह का बादशाह अपने अपने रथ में सवार हो कर याहू से मिलने के लिए शहर से निकले। उन की मुलाक़ात उस बाग़ के पास हुई जो नबोत यज़्रएली से छीन लिया गया था।
22याहू को पहचान कर यूराम ने पूछा, “याहू, क्या सब ख़ैरियत है?” याहू बोला, “ख़ैरियत कैसे हो सकती है जब तेरी माँ ईज़बिल की बुतपरस्ती और जादूगरी हर तरफ़ फैली हुई है?”
23यूराम बादशाह चिल्ला उठा, “ऐ अख़ज़ियाह, ग़द्दारी!” और मुड़ कर भागने लगा।
24याहू ने फ़ौरन अपनी कमान खैंच कर तीर चलाया जो सीधा यूराम के कंधों के दरमियान यूँ लगा कि दिल में से गुज़र गया। बादशाह एक दम अपने रथ में गिर पड़ा।
25याहू ने अपने साथ वाले अफ़्सर बिद्क़र से कहा, “इस की लाश उठा कर उस बाग़ में फैंक दें जो नबोत यज़्रएली से छीन लिया गया था। क्यूँकि वह दिन याद करें जब हम दोनों अपने रथों को इस के बाप अख़ियब के पीछे चला रहे थे और रब ने अख़ियब के बारे में एलान किया,
26‘यक़ीन जान कि कल नबोत और उस के बेटों का क़त्ल मुझ से छुपा न रहा। इस का मुआवज़ा मैं तुझे नबोत की इसी ज़मीन पर दूँगा।’ चुनाँचे अब यूराम को उठा कर उस ज़मीन पर फैंक दें ताकि रब की बात पूरी हो जाए।”
27जब यहूदाह के बादशाह अख़ज़ियाह ने यह देखा तो वह बैत-गान का रास्ता ले कर फ़रार हो गया। याहू उस का ताक़्क़ुब करते हुए चिल्लाया, “उसे भी मार दो!” इब्लीआम के क़रीब जहाँ रास्ता जूर की तरफ़ चढ़ता है अख़ज़ियाह अपने रथ में चलते चलते ज़ख़्मी हुआ। वह बच तो निकला लेकिन मजिद्दो पहुँच कर मर गया।
28उस के मुलाज़िम लाश को रथ पर रख कर यरूशलम लाए। वहाँ उसे यरूशलम के उस हिस्से में जो ‘दाऊद का शहर’ कहलाता है ख़ानदानी क़ब्र में दफ़नाया गया।
29अख़ज़ियाह यूराम बिन अख़ियब की हुकूमत के 11वें साल में यहूदाह का बादशाह बन गया था।
ईज़बिल का अन्जाम
30इस के बाद याहू यज़्रएल चला गया। जब ईज़बिल को इत्तिला मिली तो उस ने अपनी आँखों में सुरमा लगा कर अपने बालों को ख़ूबसूरती से संवारा और फिर खिड़की से बाहर झाँकने लगी।
31जब याहू महल के गेट में दाख़िल हुआ तो ईज़बिल चिल्लाई, “ऐ ज़िम्री जिस ने अपने मालिक को क़त्ल कर दिया है, क्या सब ख़ैरियत है?”
32याहू ने ऊपर देख कर आवाज़ दी, “कौन मेरे साथ है, कौन?” दो या तीन ख़्वाजासराओं ने खिड़की से बाहर देख कर उस पर नज़र डाली
33तो याहू ने उन्हें हुक्म दिया, “उसे नीचे फैंक दो!”
34फिर याहू महल में दाख़िल हुआ और खाया और पिया। इस के बाद उस ने हुक्म दिया, “कोई जाए और उस लानती औरत को दफ़न करे, क्यूँकि वह बादशाह की बेटी थी।”
35लेकिन जब मुलाज़िम उसे दफ़न करने के लिए बाहर निकले तो देखा कि सिर्फ़ उस की खोपड़ी, हाथ और पाँओ बाक़ी रह गए हैं।
36याहू के पास वापस जा कर उन्हों ने उसे आगाह किया। तब उस ने कहा, “अब सब कुछ पूरा हुआ है जो रब ने अपने ख़ादिम इल्यास तिश्बी की मारिफ़त फ़रमाया था, ‘यज़्रएल की ज़मीन पर कुत्ते ईज़बिल की लाश खा जाएंगे।
37उस की लाश यज़्रएल की ज़मीन पर गोबर की तरह पड़ी रहेगी ताकि कोई यक़ीन से न कह सके कि वह कहाँ है’।”