4 ज़रूरी है कि सब के सब मिली हुई ज़िन्दगी का एहतिराम करें। शौहर और बीवी एक दूसरे के वफ़ादार रहें, क्यूँकि ख़ुदा ज़िनाकारों और शादी का बंधन तोड़ने वालों की अदालत करेगा।
5 आप की ज़िन्दगी पैसों के लालच से आज़ाद हो। उसी पर इकतिफ़ा करें जो आप के पास है, क्यूँकि ख़ुदा ने फ़रमाया है, मैं तुझे कभी नहीं छोड़ूँगा, “मैं तुझे कभी तर्क नहीं करूँगा।”
6 इस लिए हम यक़ीन से कह सकते हैं “कि ख़ुदावन्द मेरा मददगार है, मैं ख़ौफ़ न करूँगा इंसान मेरा क्या करेगा?”
8 ईसा मसीह कल और आज और हमेशा तक यक्साँ है।
9तरह तरह की और बेगाना तालीमात आप को इधर उधर न भटकाएँ। आप तो ख़ुदा के फ़ज़ल से ताक़त पाते हैं और इस से नहीं कि आप मुख़्तलिफ़ खानों से परहेज़ करते हैं। इस में कोई ख़ास फ़ाइदा नहीं है।
15 चुनाँचे आएँ, हम ईसा के वसीले से ख़ुदा को हम्द — ओ — सना की क़ुर्बानी पेश करें, यानी हमारे होंटों से उस के नाम की तारीफ़ करने वाला फल निकले।